अरमान

24 जुलाई 2020   |  barkha solanki   (288 बार पढ़ा जा चुका है)

अरमान

बिखरे अरमानो को छोड,
देना सही हैं क्या ??

एक बार हारे हैं बस.
दुसरा मौका नही हैं क्या ??

क्यो बोझ ढो रहे हो असफलता का .
मन में हौसलो की कमी हैं क्या ??

ठान लो तो जीत हैं ..
मान लो तो हार...


जिंदगी का सफर ही हैं रुमानी
तुम्हारे लिए जीतने से ज्यादा

सीखना नही हैं क्या ? ? ?

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आलोक सिन्हा
25 जुलाई 2020

बहुत अच्छी रचना है | मन में होसलों की कमी है क्या | वाह |

barkha solanki
25 जुलाई 2020

धन्यवाद

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