आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू

27 जुलाई 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (281 बार पढ़ा जा चुका है)

आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू

साप्ताहिक प्रतियोगिता में "प्रथम" सर्वोतकृष्ठ चयनित रचना

समुह का नाम:- साहित्यिक मित्र मंडल जबलपुर ( एम. पी.)
पटल संख्या: १-२-३-४-५-६-७ एवम् ८
संपर्क:- 9708055684 / 7209833141
शीर्षक: आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू
भक्तों का सर्वश्रेष्ठ धन है गिरते आंसू
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
मानव मन होता है अति चंचल,
प्रचण्ड उच्चाटन्, अति विह्वल
दर्शन पाने की आज

उठी उत्कट् है इच्छा
व्यर्थ हुआ समस्त ज्ञान,

अधुरी गुरुकुल की शिक्षा
आलोढ़ित मन का चितवन,
मन तो आखिर है एक मन-
डोलेगा हीं, वो रे! डोलेगा
मन जब अति आह्लादित-
नयन होते तब अश्रुप्लावित
एक को ठहरा कर हीं-
दूजा कुछ तो बोलेगा
आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू
भक्तों का सर्वश्रेष्ठ धन है गिरते आंसू
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू
प्रसव-पीड़ा की विदारक चित्कार

असख्य वे झर-झर्र झरते आंसू

जन्म के समय नवजात का
क्रंदन और निसरे आंसू

सुख मिलता तब भी

बह जाते ये आंसू
दुख मिलता तब भी

टपक पड़ते हैं ये आंसू
प्रतारणा-द्वेष-कलह के आंसू
पठन-पाठन-लेखन के आंसू
ठहराये ठहरते नहीं ये आंसू
आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू
💧💧💧💧💧💧💧💧💧
भाँति-भाँति के बह ठहरते ये आंसू
आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू
धुयें के निकलते माँ के वो आंसूं
प्रेम देख प्रेयसी के गिरते आंसू
प्रेम छीन ले कोई तब भी आंसू
विश्वासधात् लख निकले आंसू
शरण मिली तब भी आते आंसू
भक्तिमय भजन कीर्तन में आँसू
आसक्ति के असफलता पर आँसू
विरक्त हुए परन्तु छुपके-

निकल पड़ते आंसू
जीत तो है जीत,

हारने पर भी निकले आंसू
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू
बहे कितने, सूख रहे ये बहते आंसू
रुग्णताजनित पीणादायक ये आंसू
स्वास्थ्यलाभ हुआ तब भी ये आंसू
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू
दिख रहा पर चू न पाता यह आंसू
अपना कुछ खो जाये तब भी आंसू
खोया पा जाने पर भी निसरे आंसू
💧💧💧💧💧💧💧💧💧
आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू
प्रिय मरण- तो बह सूखते है ये आंसू
पुनर्जीवित होने पर जीवन देख आंसू
मन ठहरे न ठहरे,

ठहर जाते ये निर्मोही आंसू
आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू
💧💧💧💧💧💧💧💧💧
आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू
बहकर गालों पर टघरते ये

ठहरे हुए आंसू
आँखों में संकेत पा

बना वाह्यश्राव है आंसू
मन में रख लेने से तो
मन धुट सा जाता है
चित्त ठहरता नहीं
वस्तु की ओर जाता है
ध्यान कठिन हो जाता है
कीर्तन में रम जब जाता है
ध्यान सहज लग जाता है
सतसंग में भाव आ रुलाता है
प्रभु चर्चा से मानव मुक्त हो जाता है
महासागर से मोती चुन ले आता है
'मानव जीवन' धन्य हो जाता है
विदेही आत्मा के प्रति

श्रद्धांजलि के आंसू
आँखों के किनारे ठहरा एक आंसू
💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧
डॉ. कवि कुमार निर्मल
बेतिया (पश्चिम चंपारण) बिहार 845438

अगला लेख: तुम मिलना मुझे



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
26 जुलाई 2020
तुम्हारी याद यों आए... यादों के कितने हीरूप हो सकते हैं – कितने ही रंग हो सकते हैं... और आवश्यक नहीं कि हर पल किसीव्यक्ति या वस्तु या जीव की याद ही व्यक्ति को आती रहती हो... व्यक्ति का मन इतनाचंचल होता है कि सभी अपनों के मध्य रहते हुए भी न जाने किस अनजान अदेखे की याद उसेउद्वेलित कर जाती है... इन्हीं
26 जुलाई 2020
20 जुलाई 2020
बाल गीत कान्हा का आज मैं गाऊँ। प्रियतम् गोप उनका बन मैं जाऊँ।।🙏🙏🌸🌸🌹🌸🌸🙏🙏🙏 🙏 "नंद गोपाला" 🙏 🙏हर कवि कृष्ण भक्त होता है'नंद' वही जो आनंद देता हैनंदन तो आनंद पाता - देता है'गोप् सदा हीं आनंद देता हैगोपालक कृष्ण कहलाते हैसूर के कृष्ण ग्वाले कहलाते हैंरागानूगा भक्ति कही गई हैप्रथम चरण रागा
20 जुलाई 2020
10 जुलाई 2020
पावस की सुषमा है छाई ||सजे कसुम्भी साड़ी सर पर, इन्द्रधनुष पर शर साधे थिरक रही है घटा साँवरी बिजली की पायल बाँधे |घन का मन्द्र मृदंग गरजता, रिमझिम रिमझिम की शहनाई ||पूरा सुनने के लिए क्लिककरें...https://youtu.be/zRVx57amQzs
10 जुलाई 2020
08 जुलाई 2020
💮🌍🌎🌎धरा विचलित🌏🌎🌍💮धरती माँ की पीड़ा- अकथनीय- अतिरेक,दिवनिशि धरती माँ रे! अश्रुपूरित रहती है,मन हुआ क्लांत - म्लान - अतिविक्षिप्त है।व्यथा-वेदना सर्प फणदंश सम- असह्य है।।जागृति की एषणा प्रचण्ड- अति तीव्र है।शंख-प्रत्यंचा सुषुप्त- रणभूमि रिक्त है।।पौरुषत्व व्यस्त स्वप्नलोक में-चिर निंद्रा में
08 जुलाई 2020
15 जुलाई 2020
कृ
आरोहण- अवरोहण अति दूभर,जल-थल-नभ है ओत-प्रोत,समय की यह विहंगम,दहकती ज्वाला हैअंध- कूप सेखींचनिकालोहे प्रभु शीध्र,अकिंचन मित्र आया है!कृष्ण! तेरा बालसखा आया हैधटा-टोप अंधेरा, सन्नाटा छाया हैअन्धकार चहुदिस, मन में तम् छाया हैगोधुली बेला की रुन- झुन रुन- झुन,मनोहर रंगोली, दीपों की माला हैदीर्ध रात्रि का
15 जुलाई 2020
11 जुलाई 2020
★☆तुम मिलना मुझे☆★ ★☆★☆★☆★☆★☆★आँखों में जब भी डूबना चाहाझट पलकें झुका ली आपनेछूना लबों को जब भी चाहाहाथ आगे कर दिया आपनेसरगोशी कर रुझाना चाहाअनसुना कर दिया आपनेगुफ़्तगू की ख़्वाहिश जगी पुरजोरतन्हा
11 जुलाई 2020
07 जुलाई 2020
शिवत्वचित्त कभी शुष्क नहीं होशिवत्व हेतु उद्यत सब होआप्लावन हेतु जल नहींपूर्ण समर्पण भाव प्रचण्डशिव जल तत्व- चंद्रधारी-जल-दुग्ध एवं विल्वपत्र नहींनवचक्रों का जागरण चाहिएछाले नहीं पड़े पैरों में भक्त के,तर्पण, अर्पण एवं भाव समर्पणप्रसन्न हों शिव, मन उनका दर्पणनहीं अन्य कोई वरदान चाहिए☆डॉ. कवि कुमार नि
07 जुलाई 2020
14 जुलाई 2020
ज़िंदगी के मोड़उचंट खाता बन खोला है सदालकीरें उकेरने का सीख रहा हूँ कायदा💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮अश्कों के संग दर्दे दिल बह जाएगा!सुकून फिर भी क्या? कभी मिल पाएगा!!मरहम छुपा उलझा रखा है-गेसुओं में अपने,आहें नज़र-अंदाज़ करने कीआदत बना डाली है!इनकार बनाया जिन्दगी का'आईन'- सवाली है!! प्यार का दस्तूर बेहिसाब,
14 जुलाई 2020
02 अगस्त 2020
असली मित्रजिंदगी से मुलाक़ातएक बार गोष्टियों में यह बात हुई।असली मित्र कौन? बहस बेबात हुई।।धमासान चला वर्षों वाक् युद्ध।अंत में निष्कर्ष यही निकला शुद्ध।।मित्रता की सोंचे वो है पगला।हम हैं तो कोई मित्र बने हमारा।।हम न रहे लो श्मशानधाट हमारा।।साँसों के तार का ताना-बाना,जीवन हीं परम मित्र हमारा।।।मुला
02 अगस्त 2020
12 जुलाई 2020
☁🌧️☁🌧️⛈️🌧️☁️⛈️☁️☆☆☆★12/07/202★☆☆☆🌧️सावन आएगा झूम के🌨️🌧️⛈️ सावन झूम के आया ⛈️🌧️⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡भादो भी मन की तिश्नगी मिटाएगा।नयन मटक्का करती चपला बाला काझूला ऊँची-ऊँची पेंगें अब लगाएगा।।युवाओं का चंचल मन यहाँ- वहाँ लखजाल फेंक डोर खींच पास ले आएगा।बरसाने का कान्हा प्यारा हर बार कुँज-गलियन में रास र
12 जुलाई 2020
09 जुलाई 2020
💦 💦💦 💦 💦💦 💦दर्द तेरा सारा, काश मैं पी पाता!अश्कों को तेरे पोछ मैं जी पाता!!ताजिंदगी निभाने का वायदा किया है,जहाँ की सारी खुशियाँ तुझे मैं दे पाता!तेरी हर चाहतों पे दिल कुरवाँ हो जाता!!🐾 🐾🐾 🐾 🐾 🐾🐾 🐾🐾 शराबोर है मेरा मन!छायें हैं मेध सधन!!तिश्नगी बेहिसाब- बेताब हूँ,शराबोर हो पिधल जा
09 जुलाई 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x