कोरोना देव की कृपा

28 जुलाई 2020   |  अशोक सिंह 'अक्स'   (294 बार पढ़ा जा चुका है)

कोरोना देव की कृपा

जीवन का नाहीं कौनों ठिकाना

मरै के चाहिय बस कौनों बहाना

बुढ़न ठेलन का बाटै आना जाना

जवनकेउ का नाहीं बाटै ठिकाना

रोग ब्याधि का बाटै ताना बाना

फैलल बा भाई वायरस कोरोना

झटके पटके में होला रोना धोना

कितना मरि गयेन बिना कोरोना

मेहर माई बाप के बाटै भाई रोना

अस्पताल वाले पैसा लूटत बाना

भागल भागल बीरन घर पहुंचना

पीछा करत करत काल पहुँचिगा

मैदान खातिर ताले गइल लवंडा

काल डस लिहेन बनी सरकंडा

विधिना लिखी दिहेन छठि के रात

टारे ना टरी उ केतनो करा प्रयास

चार महीना बीति गा अनायास

नौकरी धंधा होइ गा सत्यानाश

बचत कमाई का होइगा बंटाधार

जियय के नाहीं बाटै कौनों आधार

देखि देखि लोगन के बा बुरा हाल

भगवानौ त आजकल बाहेंन बेहाल

भक्त भी नाहीं पूछत बाहेंन हालचाल

मोदी योगी ओनके कईले बाटेन कैद

चीन पाक सरहद पर बाटेन मुश्तैद

मौकापरस्त चीन बा लगाए घात

तबै त सुधरे जब खाये उ मात

मात खाति देख पाक लागि काँपै

मुँह के आइके कलेजा लागि झाँकै

बाह रे कोरोना देव लीला अपरम्पार

कई दिहा दुनिया का पूरा बंटाधार।

➖ अशोक सिंह

अगला लेख: हिंदी की नई पाठ्यपुस्तक युवकभारती और बारहवीं के छात्र



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
11 अगस्त 2020
वंशी की वह मधुर ध्वनि... जी हाँ, यदि हम अपने चारों ओरकी ध्वनियों से – चारों ओर के कोलाहल से मुक्त करके मौन का साधन करते हुए अपनेभीतर झाँकने का प्रयास करें तो कान्हा की वह लौकिक दिव्य ध्वनि हमारे मन में गूँजसकती है... ऐसी कुछ उलझी सुलझी भावनाओं के साथ आज स्मार्तों और कल वैष्णवों कीश्री कृष्ण जयन्ती क
11 अगस्त 2020
22 जुलाई 2020
कर्म करते जाओ फल की चिंता मत करो….हम अपने आस - पास अक्सर लोंगों को बोलते हुए सुनते हैं, हर कोई आध्यात्मिक अंदाज में संदेश देते रहता है - 'कर्म करते जाओ फल की चिंता मत करो…...।' वस्तुतः ठीक भी है। एक विचार यह है कि फल की चिंता कर्म करने से पहले करना कितना उचित है अर्थात निस्वार्थ भाव से कर्म को बखूब
22 जुलाई 2020
19 जुलाई 2020
हि
नई पाठ्यपुस्तक युवकभारती और बारहवीं के छात्रहालही में जहाँ एकतरफ पूरा विश्व कोरोना महामारी अर्थात कोविड-19 से त्रस्त है वहीं महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक मंडल पुणे द्वारा बारहवीं कक्षा के लिए हिंदी विषय के पाठ्यक्रम में नई पाठ्यपुस्तक हिंदी युवक भारती प्रकाशित की गई है। ऐसे जटिल समय मे
19 जुलाई 2020
16 जुलाई 2020
16 जुलाई 2020
01 अगस्त 2020
तनाव मुक्त जीवन ही श्रेष्ठ है……आए दिन हमें लोंगों की शिकायतें सुनने को मिलती है….... लोग प्रायः दुःखी होते हैं। वे उन चीजों के लिए दुःखी होते हैं जो कभी उनकी थी ही नहीं या यूँ कहें कि जिस पर उसका अधिकार नहीं है, जो उसके वश में नहीं है। कहने का मतलब यह है कि मनुष्य की आवश्यकतायें असीम हैं….… क्योंकि
01 अगस्त 2020
10 अगस्त 2020
रात बेखबर चुपचाप सी है आओ मैं तुम्हे तुमसे रूबरू करवाउंगी मेरे डायरी में लिखे हर एक नज्म के किरदार से मिलाऊँगी मैं तुम्हे बतलाऊँगी की जब तुम नहीं थे फिर भी तुम थे जब कभी कभी दर्द आँखों से टपक जाती थी ..... कागजों पर एक बेरंग तस्वी
10 अगस्त 2020
23 जुलाई 2020
अजी ये क्या हुआ…?होली रास नहीं आयाकोरोना काल जो आयामहामारी साथ वो लायाअपना भी हुआ परायाबीपी धक धक धड़कायाछींक जो जोर से आया…तापमान तन का बढ़ायाऐंठन बदन में लायाथरथर काँपे पूरी कायाछूटे लोभ मोह मायादुश्मन लागे पूरा भायापूरा विश्व थरथराया……नाम दिया महामारीजिससे डरे दुनिया सारीचीन की चाल सभी पे भारीबौखला
23 जुलाई 2020
10 अगस्त 2020
को
कोविड की तानाशाहीहम कहते हैं बुरा न मानोमुँह को छिपाना जरूरी हैअपनेपन में गले न लगाओदूरियाँ बनाना जरूरी हैकोरोना महामारी तोएक भयंकर बीमारी हैकहने को तो वायरस हैपर छुआछूत बीमारी हैहट्टे कट्टे इंसानों पर भी एक अकेला भारी हैआँख मुँह और नाक कान सेकरता छापेमारी हैएक पखवाड़े के भीतर हीअपना जादू चलाता हैकोर
10 अगस्त 2020
06 अगस्त 2020
कल पाँच अगस्त को सारा विश्व के महान घटनाका साक्षी बना... और ये घटना थी श्री राम जन्म भूमि अयोध्या में राम मन्दिर भूमिपूजन... हम सभी वास्तव में बहुत सौभाग्यशाली हैं कि हमारे माननीय प्रधान मंत्री जीने सनातन महानुभावों की साक्षी में कल जो वहाँ भूमि पूजन किया हम सबको अपने अपनेनिवास से ही उस यज्ञ में सम्
06 अगस्त 2020
29 जुलाई 2020
बप्पा को लाना हमारी जिम्मेदारी है...अबकी बरस तो कोरोना महामारी हैउत्सव मनाना तो हमारी लाचारी हैरस्में निभाना तो हमारी वफादारी हैबप्पा को लाना तो हमारी जिम्मेदारी है।अबकी बरस हम बप्पा को भी लायेंगेंसादगी से हम सब उत्सव भी मनायेंगेंसामाजिक दूरियाँ हम सब अपनायेंगेंमास्क सेनिटाइजर प्रयोग में लायेंगें।दू
29 जुलाई 2020
30 जुलाई 2020
क्
क्या कहेंगें आप...?हम सभी जानते हैं कि प्रकृति परिवर्तनशील है। अनिश्चितता ही निश्चित, अटल सत्य और शाश्वत है बाकी सब मिथ्या है। बिल्कुल सच है, हमें यही बताया जाता है हमनें आजतक यही सीखा है। तो मानव जीवन का परिवर्तनशील होना सहज और लाज़मी है। जीवन प्रकृति से अछूता कैसे रह सकता है…? जीवन भी परिवर्तनशील ह
30 जुलाई 2020
05 अगस्त 2020
जय बोलो प्रभु श्री राम कीजय बोलो प्रभु श्री राम कीअयोध्या नगरी दिव्य धाम कीपावन नगरी के उस महिमा कीतुलसीदास जी के गरिमा कीजो जन्म भूमि कहलाता हैत्रेतायुग से जिसका नाता हैसुनि रामराज्य मन भाता है।जय बोलो प्रभु श्री राम कीअयोध्या नगरी दिव्य धाम कीजग के पालनहारी श्री रामबिगड़ी सबके बनाते कामभ्राता भरत क
05 अगस्त 2020
10 अगस्त 2020
को
कोविड की तानाशाहीहम कहते हैं बुरा न मानोमुँह को छिपाना जरूरी हैअपनेपन में गले न लगाओदूरियाँ बनाना जरूरी हैकोरोना महामारी तोएक भयंकर बीमारी हैकहने को तो वायरस हैपर छुआछूत बीमारी हैहट्टे कट्टे इंसानों पर भी एक अकेला भारी हैआँख मुँह और नाक कान सेकरता छापेमारी हैएक पखवाड़े के भीतर हीअपना जादू चलाता हैकोर
10 अगस्त 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x