अनवरत यात्रा

28 जुलाई 2020   |  Arun choudhary(sir)   (313 बार पढ़ा जा चुका है)

सभ्यता की विकास यात्रा जारी है अनवरत अनवरत,

पृथ्वी के जन्म से चल रहा है परिवर्तन अब तक।

कई प्रजातियां पौधों की और जीवों की बदल रही अविरत,

बड़े बड़े पेड़ों में और जानवरों में हो रहा बदलाव शाश्वत।

मानव सभ्यता भी वृक्ष छालों से परिवर्तित हो गई कई परिधानों में,

चक्र व अग्नि के आविष्कार ने बदल दिया,

बैल गाड़ियों को कारों और हवाईजहाजों में।

फिल्मों को रंगीन बना,कैमरा हो गया डिजिटल,

छोटे से मोबाइल में दुनियां समा,कंप्यूटर गया बदल।

सभ्यता की विकास यात्रा जारी है अनवरत अनवरत।

एक छोटी सी चिप में सारी यादें कैद हो गई,

एल्बम की अब जरूरत कहां ,

वो तो लैपटॉप पे सेट हो गई।

लैंडलाइन अब वायरलेस हो गई ,

वाईफाई से पूरी दुनिया कनेक्ट हो गई।

ऑनलाइन से स्कूल,कॉलेज और बैंक घर पहुंच गए,

चंद क्षणों में संदेश विश्वभर में हो गए वायरल ,

बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हो गए इनके कायल,

धोखाधड़ी और लूटपाट भी हो गई डिजिटल।

लोगों के किडनैप की जगह अब खाते हो रहे हैक,

सारे उपकरणों के गुलाम हो मानव सभ्यता खो रही अपना विवेक।

सभ्यता की विकास यात्रा जारी है अनवरत अनवरत।

अगला लेख: विश्वास की चादर



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
17 जुलाई 2020
को
नियति ने रचा यह चक्र है,प्रकृति से छेड़छाड़ करने पर,उसकी दृष्टि हम पे वक्र है ,नियति का रचा यह चक्र है।उसको करने चले थे खामोश, परिणाम उसी का है ये किआज हम भी है खामोश।
17 जुलाई 2020
08 अगस्त 2020
ख़
ये खामोशियां,ये खामोशियां,बहुत कुछ कह गई ;ये खामोशियां।गुस्से के बाद की खामोशियां ,क्या क्या कहती है;कोई जान ना पाता,क्या कह रही है ये खामोशियां।दो अनजान मिलें तो कुछ कहती है खामोशियां;बहुत कुछ आंखें बयां
08 अगस्त 2020
17 जुलाई 2020
रोज इंतेज़ार करते है, तुम्हारे इन अलफाजों का,शोर मच जाता है,इस खामोशी के आलम में,जब आगाज़ होता है, इन अलफाजों का।
17 जुलाई 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x