बिन डाल का पत्ता

29 जुलाई 2020   |  मंजू गीत   (292 बार पढ़ा जा चुका है)

बिन डाल का पत्ता बिन डाल का पत्ता, उसके लिए जग सारा होता है। पहुंच जाता है बिन रोक टोक, गली, छत, बालकनी, मकान, दुकान, राह अनेक.. बिन डाल का पत्ता, आवारा बंजारा होता है। जहां ले चले, हवा के झोंके उनकेे संग उसका जहां में आना जाना दूर, दराज तक होता है। बिन डाल का पत्ता, बेचारा होता है। आ जाता है, कितनों के ही पांव के नीचे? हर कोई उसे कूड़ा समझ, झाड़ू से सरका देता है। आग लगाने के लिए बस एक माचिस की तीली का खींचा जाना होता है। बिन डाल का पत्ता, यादों का सहारा होता है। पीपल, पान के पत्तों में दिल का इशारा होता है। सूखकर भी यादों की किताब के पन्नो में रखा होता है। पत्ता पत्ता बूटा बूटा, पीपल के पत्तो पर लिख दी दिल की बात जैसे गानों में, मीत से मन का हाल कहने का सहारा होता है। बिन डाल का पत्ता, बरगद, बेलपत्र पत्ता अपनाकर,इश्वर को खुश कर, कामना पूर्ति के लिए लिखा पत्र होता है। बिन डाल का पत्ता, बहती धारा में सहारा होता है। दशा, दिशा बन बहती धारा में जलते दिये को आधार दें, दूर तक साथ ले जाता है। बिन डाल का पत्ता, जाने किस हाथ जाना है लिखा? टूट कर किस ओर है, उसे जाना... बिन डाल का पत्ता, परमात्मा की मर्जी... उसके बिना तो वो भी नहीं हिलता। बिन डाल का पत्ता...

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