अपना ख्याल रखना

30 जुलाई 2020   |  barkha solanki   (261 बार पढ़ा जा चुका है)

अपना ख्याल रखना

कि तुम्हे पता भी नही

कितने बेपरवाह हो तुम

दिन को रात ,

रात को दिन बना रखते हो

दुर हु तुमसे... पर फिर भी मेरी बात का मान ऱखना

....मेरी खुशी के लिए...अपना ख्याल रखना...

माना कि अब मे पास नही तुम्हे डाटँने का बहाना भी कुछ खास नही

मेरी हर झल्लाहट का एहसास रखना

अपनी मसरुफ जिंदगी को थोड़ा -सा

गुलजार ऱखना....

दुर हु तुमसे... पर फिर भी मेरी बात का मान ऱखना

... मेरी खुशी के लिए....अपना ख्याल रखना...

साँझ ढले तब आगँन मे बैठे

पंछियो से प्यार करना...

मीठी चाय के कप से

अपनी दिन भर की थकान को...

हौले से अलविदा कहना...

फिर मुस्कुरा कर अपने

चेहरे पर रौनके तमाम रखना

दुर हु तुमसे... पर फिर भी मेरी बात का मान ऱखना

...मेरी खुशी के लिए..... अपना ख्याल रखना...

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आलोक सिन्हा
01 अगस्त 2020

अच्छी रचना है । मन के सहज भावों को अभिव्यक्त करने वाली । शुभ कामनाएं ।

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