कोरोना में रक्षाबंधन का स्वरूप

02 अगस्त 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (297 बार पढ़ा जा चुका है)

कोरोना में रक्षाबंधन का स्वरूप

कोरोना में रक्षाबंधन का स्वरूप


कोरोनाकाल में रक्षाबंधन का स्वरूप-

चिपका होठों से हलाहल का प्याला है

लुप्त हो रहा आतंकि कोरोना समित हो,

पर जाते जाते स्वरूप बदल डाला है

एकलौता भाई- अटका उदास सात समुन्दर पार-

आंसुओं में सारा जग डूबा है

रक्षाबंधन आ हर्षाया हर बार--

भाई-बहन का मिलन होता सबसे प्यारा है

जय हो! जय हो!! भाई-बहन का प्यार अमर हो!!!

सदियों ने यही दुहराया है

बहन सतायु की मनसा रखती,

भाई ने रक्षा का दायित्व भी सदा हीं निभाया है

सहृदय बधाई हर भाई-बहन को,

पावन उत्सव हर सावन की भाँति रे आया है

इस बार दूरी दो हाथ नहीं, दस योजन भारी-

ये सोंच कवि अश्रु बहुत बहाया है

नाँव से उफनती नदी पार कर जाते थे,

अब तो घर मे रह- 'फोन' एक सहारा है


एक अकिंचन पुर्वाग्रही मित्र:

डॉ. कवि कुमार निर्मल

बेतिया (पश्चिम चंपारण) बिहार 845438

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