कोविड की तानाशाही...

10 अगस्त 2020   |  अशोक सिंह 'अक्स'   (1840 बार पढ़ा जा चुका है)

कोविड की तानाशाही


हम कहते हैं बुरा न मानो

मुँह को छिपाना जरूरी है

अपनेपन में गले न लगाओ

दूरियाँ बनाना जरूरी है

कोरोना महामारी तो

एक भयंकर बीमारी है

कहने को तो वायरस है

पर छुआछूत बीमारी है

हट्टे कट्टे इंसानों पर भी

एक अकेला भारी है

आँख मुँह और नाक कान से

करता छापेमारी है

एक पखवाड़े के भीतर ही

अपना जादू चलाता है

कोरेन्टाइन के भीतर ही

अपना ये धौस जमाता है

गला फेफड़ा श्वासनली को

अपनी गिरफ्त में लेता है

बीड़ी सिगरेट व गुटकावालों को

सीधे यमलोक पहुँचाता है

मधुमेह हार्ट के रोगी को तो

जन्नत का सैर कराता है

निर्धन धनपति या हो चिकित्सक

भेद-भाव नहीं करता है

महलों में रहने वालों का

ये जेब टटोला करता है

कोई कहता मानव निर्मित

जैविक हथियार बताता है

कोई बोले बहुरूपिया है

रूप बदलता जाता है

चीन अमेरिका इटली फ्रांस को

नाकों चने चबवाया है

कब्रिस्तान भी छोटा पड़ गया

इतना लाश गिराया है

मोदी डर गए योगी डर गए

डर गई दुनिया सारी

लॉक डाउन का ऐलान हुआ तो

डर गए सारे व्यापारी

ट्रेन रुक गई प्लेन रुक गई

रुक गई आवाजाही

कितने बेरोजगार हो गए

खतरे में नौकरशाही

पूरे विश्व पर राज किया वो

कोविड - 19 की तानाशाही

वैक्सीन टीके का जो दावा करते

उनको नकेल पहनाया है

अपना परचम फहराकर

हरपल लोहा मनवाया है

वैज्ञानिक भी हैं दावा करते

कोरोना का अंतकाल भी आएगा

जब एक कोविड पीड़ित ही

कोविड वायरस को मारेगा…

टूटेगी श्रृंखला फिर इसकी

सारा विश्व मुस्कुराएगा…

सारा विश्व मुस्कुराएगा...।


➖ प्रा. अशोक सिंह….✒️

अगला लेख: स्वस्थ रहना है तो....



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
10 अगस्त 2020
रात बेखबर चुपचाप सी है आओ मैं तुम्हे तुमसे रूबरू करवाउंगी मेरे डायरी में लिखे हर एक नज्म के किरदार से मिलाऊँगी मैं तुम्हे बतलाऊँगी की जब तुम नहीं थे फिर भी तुम थे जब कभी कभी दर्द आँखों से टपक जाती थी ..... कागजों पर एक बेरंग तस्वी
10 अगस्त 2020
11 अगस्त 2020
वंशी की वह मधुर ध्वनि... जी हाँ, यदि हम अपने चारों ओरकी ध्वनियों से – चारों ओर के कोलाहल से मुक्त करके मौन का साधन करते हुए अपनेभीतर झाँकने का प्रयास करें तो कान्हा की वह लौकिक दिव्य ध्वनि हमारे मन में गूँजसकती है... ऐसी कुछ उलझी सुलझी भावनाओं के साथ आज स्मार्तों और कल वैष्णवों कीश्री कृष्ण जयन्ती क
11 अगस्त 2020
11 अगस्त 2020
सा
सागर की लहरें...सागर की लहरें किनारे से बार-बार टकरातीचीखती उफान मारती रह-रहकर इतरातीमन की बेचैनी विह्वलता साफ झलकतीसदियों से जीवन की व्यथा रही छिपाती पर किनारे पहुँचते ही शांत सी हो जातीवह अनकही बात बिना कहे लौट जातीअपने स्पर्श से मन आल्हादित कर जातीसंग खेलने के लिए उत्साहित हो उकसातीजैसे ही हाथ बढ़
11 अगस्त 2020
09 अगस्त 2020
मै
मैं सड़क …अरे साहबकोरोना महामारी के कारणफुर्सत मिलीआपबीती सुनाने कामौका मिला।सदियों से सेवाव्रतीदिन-रात सजग तैनातसीनें पर सरपट दौड़ती गाड़ियों का अत्याचार।हाँ साहब.. 'अत्याचार'तेजगति से बेतहाशाचीखती - चिल्लातीभागती गाड़ियाँ..।क्षमता से अधिकबोझ लादे…आवश्यकता से अधिकरफ़्तार में भागती गाड़ियाँ...।मेरे चिथड़े
09 अगस्त 2020
28 जुलाई 2020
को
कोरोना देव की कृपाजीवन का नाहीं कौनों ठिकानामरै के चाहिय बस कौनों बहाना बुढ़न ठेलन का बाटै आना जानाजवनकेउ का नाहीं बाटै ठिकानारोग ब्याधि का बाटै ताना बानाफैलल बा भाई वायरस कोरोनाझटके पटके में होला रोना धोनाकितना मरि गयेन बिना कोरोनामेहर माई बाप के बाटै भाई रोनाअस्पताल वाले पैसा लूटत बानाभागल भागल बीर
28 जुलाई 2020
08 अगस्त 2020
वक्त अच्छा हो तो….कोरोना काल में अंतर्मन ने पूछा -इस दुनिया में तुम्हारा अपना कौन है..?सवाल सुनते हीएक विचार मन में कौंधामाँ-बाप, भाई-बहन, पत्नी…बेटा - बेटी या फिर मित्र..किसे कहूँ अपना..?यदि वक़्त अच्छा हो तोजो अदृश्य हैसर्वशक्तिमान हैसर्वव्यापी हैवो भी अपना है तब सब कुछ ठीक है।वक़्त अच्छा हो तोमाँ-ब
08 अगस्त 2020
15 अगस्त 2020
अब नहीं रहा.....NO more...ईश्वर की लीला ईश्वर ही जानें..देता है तो जी भर देता हैलेता है तो कमर तोड़ देता हैपरीक्षा भी लेता है तो कितना कठिन, दुष्कर, प्राणघातकसबकुछ छीन लेता है- प्राण तकजिसने सबकुछ झेलाकभी कुछ न बोलाउफ़ तक न कियासँभलने का समय आया तोउसी के साथ इतना बड़ा अन्यायआखिर क्यों...?क्या इस क्यों.
15 अगस्त 2020
29 जुलाई 2020
बप्पा को लाना हमारी जिम्मेदारी है...अबकी बरस तो कोरोना महामारी हैउत्सव मनाना तो हमारी लाचारी हैरस्में निभाना तो हमारी वफादारी हैबप्पा को लाना तो हमारी जिम्मेदारी है।अबकी बरस हम बप्पा को भी लायेंगेंसादगी से हम सब उत्सव भी मनायेंगेंसामाजिक दूरियाँ हम सब अपनायेंगेंमास्क सेनिटाइजर प्रयोग में लायेंगें।दू
29 जुलाई 2020
14 अगस्त 2020
जि
जिंदगी जिओ पर संजीदगी से…….आजकल हम सब देखते हैं कि ज्यादातर लोगों में उत्साह और जोश की कमी दिखाई देती है। जिंदगी को लेकर काफी चिंतित, हताश, निराश और नकारात्मकता से भरे हुए होते हैं। ऐसे लोंगों में जीवन इच्छा की कमी सिर्फ जीवन में एक दो बार मिली असफलता के कारण आ जाती है। फिर ये हाथ पर हाथ रखकर बैठ जा
14 अगस्त 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x