कोविड की तानाशाही...

10 अगस्त 2020   |  अशोक सिंह   (1837 बार पढ़ा जा चुका है)

कोविड की तानाशाही


हम कहते हैं बुरा न मानो

मुँह को छिपाना जरूरी है

अपनेपन में गले न लगाओ

दूरियाँ बनाना जरूरी है

कोरोना महामारी तो

एक भयंकर बीमारी है

कहने को तो वायरस है

पर छुआछूत बीमारी है

हट्टे कट्टे इंसानों पर भी

एक अकेला भारी है

आँख मुँह और नाक कान से

करता छापेमारी है

एक पखवाड़े के भीतर ही

अपना जादू चलाता है

कोरेन्टाइन के भीतर ही

अपना ये धौस जमाता है

गला फेफड़ा श्वासनली को

अपनी गिरफ्त में लेता है

बीड़ी सिगरेट व गुटकावालों को

सीधे यमलोक पहुँचाता है

मधुमेह हार्ट के रोगी को तो

जन्नत का सैर कराता है

निर्धन धनपति या हो चिकित्सक

भेद-भाव नहीं करता है

महलों में रहने वालों का

ये जेब टटोला करता है

कोई कहता मानव निर्मित

जैविक हथियार बताता है

कोई बोले बहुरूपिया है

रूप बदलता जाता है

चीन अमेरिका इटली फ्रांस को

नाकों चने चबवाया है

कब्रिस्तान भी छोटा पड़ गया

इतना लाश गिराया है

मोदी डर गए योगी डर गए

डर गई दुनिया सारी

लॉक डाउन का ऐलान हुआ तो

डर गए सारे व्यापारी

ट्रेन रुक गई प्लेन रुक गई

रुक गई आवाजाही

कितने बेरोजगार हो गए

खतरे में नौकरशाही

पूरे विश्व पर राज किया वो

कोविड - 19 की तानाशाही

वैक्सीन टीके का जो दावा करते

उनको नकेल पहनाया है

अपना परचम फहराकर

हरपल लोहा मनवाया है

वैज्ञानिक भी हैं दावा करते

कोरोना का अंतकाल भी आएगा

जब एक कोविड पीड़ित ही

कोविड वायरस को मारेगा…

टूटेगी श्रृंखला फिर इसकी

सारा विश्व मुस्कुराएगा…

सारा विश्व मुस्कुराएगा...।


➖ प्रा. अशोक सिंह….✒️

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