चरित्र का चीरहरण

11 अगस्त 2020   |  Arun choudhary(sir)   (492 बार पढ़ा जा चुका है)

झूठा सम्मान पाने के लिए ,मैंने कभी चरित्र की इमारत नहीं खड़ी की;

लोगों को दिखाने के लिए, मैंने कभी चरित्र की खांट नहीं बुनी;

धन कमाने के लिए,मैंने कभी चरित्र का परिधान नहीं सिलवाया;

किसी को खुश करने के लिए,मैंने कभी चरित्र का जबरन चित्रण नहीं किया।

अपने को पूज्यनीय बनाने के लिए,कभी चरित्र का आडंबर नहीं रचा ;

नौकरी में बने रहने के लिए, कभी मैंने चरित्र का सहारा नहीं लिया;

विवाह करने के लिए,कभी मैंने चरित्र का बेमतलब बखान नहीं किया।

चरित्र एक उपरी आवरण नहीं ,यह तो दिल में बसा अपना आचरण है;

चरित्र पर कोई सवाल खडा करेें, उसके लिए वास्तव में यह तो चिर हरण ही है।

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