मस्त हवाओं का ये झोंका....

13 अगस्त 2020   |  अशोक सिंह   (440 बार पढ़ा जा चुका है)

मस्त हवाओं का ये झोंका, बेमौसम ही प्यार करे…

प्रियतम पास नहीं हैं फिर भी मिलन को बेकरार करे

जीवन में बहार नहीं फिर भी प्रणय गीत स्वर नाद करे

सजना की कोई खबर नहीं फिर जीना क्यों दुस्वार करे

बिन तेरे सजना जीना मुश्किल रग - रग में है ज्वार उठे

तेरे ही नाम से मेरी सुबह हुई है तेरे ही नाम से शाम ढले।


मस्त हवाओं का ये झोंका, बेमौसम ही प्यार करे……

बिन सावन के जियरा हुलसै प्यार बिना मौसम के उमड़े

बाई आँख जो फरकनी लागे पिय आगमन के आस जागे

अंबर से अवनी तक जग में अपना ही तो प्यार पले

प्यार के खातिर ही तो सूरज-चाँद भी दिन-रात चलें

चाँदनी रात सुहाना मौसम प्रियतम के बिनु आग लगे।


मस्त हवाओं का ये झोंका, बेमौसम ही प्यार करे…..

मलय पवन को संगि ले घूमे मंद-मंद मुस्कान भरे

कामदेव भी प्रमुदित होकर पवन देव के साथ चले

प्रिया की छवि को देखिके कामुक हो धरि संग चले

प्रेमरति अग्निहोत्री ने तो रग रग को अपने वश में धरे

विरिहिणी बनि प्रियतम के बिनु अंतरंग में स्वयं जले।


मस्त हवाओं का ये झोंका, बेमौसम ही प्यार करे….

कोरोना काल में प्रिय के बिनु जीना अब दुस्वार करे

आखिर कब तक मन को मारे सभाले अब नाहीं संभरे

कामदेव तो पीछे लगि गये प्रेमरति की ओर हैं खींचें

तुम बिनु दिनरात न बीते कब तक रहूँ मैं बहियां भींचे

अब तो यहि तन बैरन लागे बिनु माली कौन सींचे।


मस्त हवाओं का ये झोंका, बेमौसम ही प्यार करे….

प्रीति बिना जीवन सूना लागे सूने हैं बाग-बगीचे

भइ दशा जसि जल बिनु मछली कोई आगे न पीछे

का वर्षा जब कृषि सुखाने समय गये कोई ना पूछे

समय समय पर करे जुताई और बीज बुआई पीछे

खेती उत्तम वहीं होत है जहां देखि भालि के सींचे


➖ अशोक सिंह.....✒️


अगला लेख: स्वस्थ रहना है तो....



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
10 अगस्त 2020
को
कोविड की तानाशाहीहम कहते हैं बुरा न मानोमुँह को छिपाना जरूरी हैअपनेपन में गले न लगाओदूरियाँ बनाना जरूरी हैकोरोना महामारी तोएक भयंकर बीमारी हैकहने को तो वायरस हैपर छुआछूत बीमारी हैहट्टे कट्टे इंसानों पर भी एक अकेला भारी हैआँख मुँह और नाक कान सेकरता छापेमारी हैएक पखवाड़े के भीतर हीअपना जादू चलाता हैकोर
10 अगस्त 2020
09 अगस्त 2020
हम ईश्वर को यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ ढूँढ़ते फिरते हैं, लेकिन अपने भीतरझाँककर नहीं देखते... हमारा ईश्वर तो हमारे भीतर ही हमारी आत्मा के रूप मेंविराजमान है... प्रकृति के हर कण में... हर चराचर में ईश्वर विद्यमान है... जिसदिन उस ईश्वर के दर्शन कर लिए उस दिन से उसे कहीं ढूँढने की आवश्यकता नहीं रहजाएगी... कुछ
09 अगस्त 2020
09 अगस्त 2020
मै
मैं सड़क …अरे साहबकोरोना महामारी के कारणफुर्सत मिलीआपबीती सुनाने कामौका मिला।सदियों से सेवाव्रतीदिन-रात सजग तैनातसीनें पर सरपट दौड़ती गाड़ियों का अत्याचार।हाँ साहब.. 'अत्याचार'तेजगति से बेतहाशाचीखती - चिल्लातीभागती गाड़ियाँ..।क्षमता से अधिकबोझ लादे…आवश्यकता से अधिकरफ़्तार में भागती गाड़ियाँ...।मेरे चिथड़े
09 अगस्त 2020
14 अगस्त 2020
जि
जिंदगी जिओ पर संजीदगी से…….आजकल हम सब देखते हैं कि ज्यादातर लोगों में उत्साह और जोश की कमी दिखाई देती है। जिंदगी को लेकर काफी चिंतित, हताश, निराश और नकारात्मकता से भरे हुए होते हैं। ऐसे लोंगों में जीवन इच्छा की कमी सिर्फ जीवन में एक दो बार मिली असफलता के कारण आ जाती है। फिर ये हाथ पर हाथ रखकर बैठ जा
14 अगस्त 2020
15 अगस्त 2020
अब नहीं रहा.....NO more...ईश्वर की लीला ईश्वर ही जानें..देता है तो जी भर देता हैलेता है तो कमर तोड़ देता हैपरीक्षा भी लेता है तो कितना कठिन, दुष्कर, प्राणघातकसबकुछ छीन लेता है- प्राण तकजिसने सबकुछ झेलाकभी कुछ न बोलाउफ़ तक न कियासँभलने का समय आया तोउसी के साथ इतना बड़ा अन्यायआखिर क्यों...?क्या इस क्यों.
15 अगस्त 2020
11 अगस्त 2020
सा
सागर की लहरें...सागर की लहरें किनारे से बार-बार टकरातीचीखती उफान मारती रह-रहकर इतरातीमन की बेचैनी विह्वलता साफ झलकतीसदियों से जीवन की व्यथा रही छिपाती पर किनारे पहुँचते ही शांत सी हो जातीवह अनकही बात बिना कहे लौट जातीअपने स्पर्श से मन आल्हादित कर जातीसंग खेलने के लिए उत्साहित हो उकसातीजैसे ही हाथ बढ़
11 अगस्त 2020
16 अगस्त 2020
ऐसा भी दिन आएगा कभी सोचा न था….सृष्टि के आदि से लेकर आजतक न कभी ऐसा हुआ था और शायद न कभी होगा….। जो लोग हमारे आसपास 80 वर्ष से अधिक आयु वाले जीवित बुजुर्ग हैं, आप दस मिनिट का समय निकालकर उनके पास बैठ जाइए और कोरोना की बात छेड़ दीजिए। आप देखेंगे कि आपका दस मिनिट का समय कैसे दो से तीन घंटे में बदल गया
16 अगस्त 2020
09 अगस्त 2020
मै
मैं सड़क …अरे साहबकोरोना महामारी के कारणफुर्सत मिलीआपबीती सुनाने कामौका मिला।सदियों से सेवाव्रतीदिन-रात सजग तैनातसीनें पर सरपट दौड़ती गाड़ियों का अत्याचार।हाँ साहब.. 'अत्याचार'तेजगति से बेतहाशाचीखती - चिल्लातीभागती गाड़ियाँ..।क्षमता से अधिकबोझ लादे…आवश्यकता से अधिकरफ़्तार में भागती गाड़ियाँ...।मेरे चिथड़े
09 अगस्त 2020
22 अगस्त 2020
💮💮 हरिकृपाहि केवलम् 💮💮मुझे तुम्हारे अलावा कभी किसी और से कोई दरकार नही हुईमुझे तुम्हारे सामिप्य औरकृपा के अलावाकभी कोई चाहत नहीं हुईजब भी कुछ चाहा,तुमसे मन की बातआँखों के इशारे से,पूरी हुईहर जरुरत, शिशु मानिंद ममत्व लूटा-अबोध समझा, और पूरी हुई हर कदम पर साथ रह, बता करमुझे चला, हर सफर पूरी भी ह
22 अगस्त 2020
13 अगस्त 2020
परसों यानीपन्द्रह अगस्त को पूरा देश स्वतन्त्रता दिवस की वर्षगाँठ पूर्णहर्षोल्लास के साथ मनाएगा... अपने सहित सभी को स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक बधाईऔर शुभकामनाएँ... स्वतन्त्रता –आज़ादी – व्यक्ति को जब उसके अपने ढंग से जीवंन जीने का अवसर प्राप्त होता है तोनिश्चित रूप से उसका आत्मविश्वास बढ़ने के साथ ही
13 अगस्त 2020
11 अगस्त 2020
सा
सागर की लहरें...सागर की लहरें किनारे से बार-बार टकरातीचीखती उफान मारती रह-रहकर इतरातीमन की बेचैनी विह्वलता साफ झलकतीसदियों से जीवन की व्यथा रही छिपाती पर किनारे पहुँचते ही शांत सी हो जातीवह अनकही बात बिना कहे लौट जातीअपने स्पर्श से मन आल्हादित कर जातीसंग खेलने के लिए उत्साहित हो उकसातीजैसे ही हाथ बढ़
11 अगस्त 2020
22 अगस्त 2020
पिछले कुछ दिनोंसे बरखा रानी लगातार अपना मादक नृत्य दिखा दिखा कर रसिक जनों को लुभा रही हैं... और पर्वतीय क्षेत्रों में तो वास्तव मेंग़ज़ब का मतवाला मौसम बना हुआ है... तन और मन को अमृत रस में भिगोतीं रिमझिमफुहारें... हरित परिधान में लिपटी प्रेयसि वसुंधरा से लिपट उसका चुम्बन लेते ऊदेकारे मेघ... एक ओर अपन
22 अगस्त 2020
01 अगस्त 2020
हि
हिंदी साहित्य के धरोहर "मुंशी प्रेमचंद"जनमानस का लेखक, उपन्यासों का सम्राट और कलम का सिपाही बनना सबके बस की बात नहीं है। यह कारनामा सिर्फ मुंशी प्रेमचंद जी ने ही कर दिखाया। सादा जीवन उच्च विचार से ओतप्रोत ऐसा साहित्यकार जो साहित्य और ग्रामीण भारत की समस्याओं के ज्यादा करीब रहा। जबकि उस समय भी लिखने
01 अगस्त 2020
15 अगस्त 2020
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳जय हिन्द🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🌏 🌎 🌍 ।।धरा विचलित है।। 🌎 🌏 🌏🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳धरती माता की पीड़ा- अकथनीय- अतिरेकआर्यावर्त भू - खण्ड संकुचन! भारतीय चेतपच्चहत्तरवें वर्ष में प्रवेश, विश्व-गुरु बन देखवंदे मातरम् अंगिभूत कर दासता भाव फेंकदिवनिशि धरती
15 अगस्त 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x