स्वतंत्रा और आत्मनिर्भरता

15 अगस्त 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (457 बार पढ़ा जा चुका है)

स्वतंत्रा और आत्मनिर्भरता

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳जय हिन्द🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

🌏 🌎 🌍 ।।धरा विचलित है।। 🌎 🌏 🌏

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धरती माता की पीड़ा- अकथनीय- अतिरेक

आर्यावर्त भू - खण्ड संकुचन! भारतीय चेत

पच्चहत्तरवें वर्ष में प्रवेश, विश्व-गुरु बन देख

वंदे मातरम् अंगिभूत कर दासता भाव फेंक


दिवनिशि धरती माँ रे! अश्रुपूरित- व्यथित है।

मानव मन क्लांत, म्लान- अतिशय छुब्द है।।

मन भयाक्रांत- कोरोना फण ताने- फुफकार रहा है।

दंश पीड़ा असह्य- "तमसा्" से मन-तन बिषाक्त है।।

"नूतन पृथ्वी" की एषणा प्रचण्ड, आशान्वित हम है।

शंख-प्रत्यंचा सुषुप्त- वीर मौन- रणभूमि रिक्त है!

तरुण-युवागण- प्रौढ़- वृद्व स्वप्नलोक में व्यस्त हैं!!

कलियुग यह चहुँदिसी, प्रगाढ़ निंद्रा में सभी लिप्त है।

चरैवेति!चरैवेति!! शंखनाद् हो- पार्थ-सारथी संग है।।

हर नारी में दुर्गा अवसान, मौन- शोणित पर विनम्र है।

कौन (?) वीर करेगा आकर धर्मरक्षा की भरपाई,

जन-साधारण दग्ध, त्रस्त- हुआ निस्क्रिय है।।

अवतरण अवश्यंभावी पुनः शिव-कृष्ण का

आहत् सति आत्मदाह को आज प्रस्तुत है।

ध्रिणा-द्वेष-प्रतिशोध-लोभ-काम-अनुरक्ति की,

ज्वाला अतिउग्र, भावी महाविनाश प्रचण्ड है।।

आर्तनाद् गुँजायमान- धराधाम पर व्याप्त तमसा है।

धरा-जल-नभ प्राणवायु हीन (!) तम् परिलक्षित है।।

पथ अतिदुस्तर - कंटकाजीर्ण भयावह- विकट है।

थम जायेगी लखयुगों से चलायमान् धरा धुरी पर,

रवि रथ-चक्र ओजहीन तमस से व्यथित- बाधित है।।

मौन व्योम सौर्य मण्डल-नक्षत्र-सप्त ऋषि तारिकायें,

शुभ लक्षण ब्राह्म मूहर्त का अरुणिमा हुई प्रकट है।।

शंखनाद् गुँजायमान, मत कह बँधु! धरा विचलित है।

नभ्य मानवतावादी सैन्यदल कुरुक्षेत्र में आहुत है।।


💥💥💥 💥 डॉ. कवि कुमार निर्मल 💥 💥💥💥

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