तन्हाई ये तन्हाई

16 अगस्त 2020   |  Arun choudhary(sir)   (421 बार पढ़ा जा चुका है)

तन्हाई ये तन्हाई , डरा देती है ये तन्हाई;

ज़िन्दगी में कई बार,गुजरा हूं इस तन्हाई से;

दिल धड़कता है,जब सामना होता है तन्हाई से।

बचपन से ही उठ गया, मां बाप का वह साया;

वृद्धावस्था से जूझ रहे, नाना नानी का मिला साया;

बालपन से ही तन्हा था,मिली मामा की छत्रछाया;

किशोरावस्था में कई दोस्त बने,मिला मुझे हमसाया।

नाना नानी की मौत के बाद,फिर से मिली मुझे तन्हाई;

दूर शहर हॉस्टल में पहुंच, शुरू हुई फिर एक कहानी;

दोस्त बिछुड़े ,परिवार छूटा,फिर मैं रह गया तन्हा तन्हा;

मां बाप,नाना नानी,मामा और दोस्तों से हो गई जुदाई;

तन्हाई ये तन्हाई, डरा देती हैं ये वीरान सी तन्हाई।

नए दोस्त मिले,नई दुनिया मिली,दूर हुई फिर तन्हाई;

स्कूली शिक्षा पूरी होते ही ,कॉलेज में प्रवेश की तैयारी;

महानगर पहुंच शुरू हुई, एक नई खिलंदड़ी ज़िन्दगी ;

तब आयी मेरी ज़िन्दगी में,एक बयार ले सुन्दर सी बंदगी।

तन्हाई के दूर होते ही ,शुरू हुई अलग प्रेम की अनुभूति;

पंख लगा कर समय उड़ चला,पता ही नहीं चली उसकी गति;

कब हम दोनों के बीच ,एक दूसरे के प्रति हो गई प्रीति।

अचानक से वह कहीं चली गई,कोहरे की धुंध में जैसे खो गई;

पता चला उसकी तय हो गई शादी,चंद दिनों बाद होगी उसकी बिदाई;

आखिर एक बार फिर ,मेरी जिंदगी में घर कर गई ये तन्हाई।

अपनी कमजोरी को ताकत बनाओ,यह मैंने सुना था बहुत;

मैंने भी इसी तन्हाई को बना अपना साथी,रच दिया साहित्य बहुत।

तन्हाई ये तन्हाई ,अब ना डरा पाती मुझे ये तन्हाई।

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