मुक्तक

30 अगस्त 2020   |  महातम मिश्रा   (301 बार पढ़ा जा चुका है)

"मुक्तक"

आज गर्मी ने किया बेहाल है।

रे कोरोना अब तेरा क्या हाल है।

घूम आया विश्व में कुंहराम कर-

देख भारत में रुकी वह चाल है।।


सिर झुका कर जा जहाँ से आया था।

रे कोरोना जा जहाँ तू जाया था।

आदमी को आश्रय देता भारत है-

चीन बौना है तुझे भरमाया था।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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