मुक्तक

30 अगस्त 2020   |  महातम मिश्रा   (276 बार पढ़ा जा चुका है)

"मुक्तक"


राखी में इसबार प्रिय, नहीं गलेगी दाल।

जाऊँगी मयके सजन, लेकर राखी लाल।

बना रखी हूँ राखियाँ, वीरों से है प्यार-

चाल चीन की पातकी, फुला रहा है गाल।।


सीमा पर भाई खड़े, घर में मातर धाम।

वर्षा ऋतु राखी लिए, बुला रही ले नाम।

भैया अपने हाथ से, बाँध रही हूँ स्नेह-

क्या कर लेगा चाइना, कर दो काम तमाम।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: दोहा



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
मु
30 अगस्त 2020
मु
30 अगस्त 2020
मु
30 अगस्त 2020
मु
30 अगस्त 2020
गी
22 अगस्त 2020
मु
30 अगस्त 2020
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x