चलो नहायें बारिश में -- बाल कविता

02 सितम्बर 2020   |  रेणु   (504 बार पढ़ा जा चुका है)

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चलो नहायें बारिश में


लौट कहाँ फिर आ पायेगा ?

ये बालापन अनमोल बड़ा ,
जी भर आ भीगें पानी में
झुलसाती तन धूप बड़ा ;
गली - गली उतरी नदिया
कागज की नाव बहायें बारिश में !
चलो नहायें बारिश में !


झूमें डाल- डाल गलबहियाँ,
गुपचुप करलें कानाबाती
करेंगे मस्ती और मनमानी
सीख आज हमें ना भाती ,

लोट - लोट लिपटें माटी से

और गिर -गिर जाएँ बारिश में !
चलो नहायें बारिश में !


भरेंगी खाली ताल -तलैया

सूखे खेत हरे कर देंगी

अंबर से झरती टप- टप बूँदें

हरेक दिशा शीतल कर देंगी

धुल -धुल होगा गाँव सुहाना

चलो घूम के आयें बारिश में

चलो नहायें बारिश में


घर आँगन तालाब बन गये

छप्पकछैया करें - जी चाहे

उमड़ -घुमडते भाते बादल

ठंडी हवा तन -मन सिहराए

बेकाबू हुआ उमंग भरा मन

चलो नाचें -गायें बारिश में

चलो नहायें बारिश में


चित्र - गूगल से साभार

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हर्ष वर्धन जोग
13 सितम्बर 2020

सुंदर

रेणु
11 मई 2021

सादर आभार हर्ष जी

रेणु
07 सितम्बर 2020

सादर आभार है आलोक जी

आलोक सिन्हा
04 सितम्बर 2020

झूमें डाल- डाल गलबहियाँ,
गुपचुप करलें कानाबाती बहुत मधुर रचना है |

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