शब्द रूचि

05 सितम्बर 2020   |  विवेक भारद्वाज   (427 बार पढ़ा जा चुका है)

मैं शब्द रूचि उन बातों की जो भूले सदा ही मन मोले-2


अँगड़ाई हूँ मैं उस पथ का जो चले गए हो पर शोले-2


हर बूँदो को हर प्यासे तक पहुँचाने का आधार हूँ मैं-2


मैं बड़ी रात उन आँखो का जो जागे हो बिना खोलें-2


जो कभी नहीं बोला खुल कर वो आशिक़ की जवानी हूँ।-2


मीरा की पीर बिना बाँटे राधा के श्याम सुहाने हैं।-2

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06 सितम्बर 2020
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