मैं शीश झुकाऊँ मानव को

08 सितम्बर 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (409 बार पढ़ा जा चुका है)

मैं शीश झुकाऊँ मानव को

मैं शीश झुकाऊँ मानव को

इस जीवन को मैं केवल सपना क्यों समझूँ,
हर भोर उषा की किरण जगाती है मुझको
हर शाम निशा की बाहों में मुस्काता है
चंदा, मस्ती छाती मुझको ||

रचना सुनने के लिए देखें वीडियो... कात्यायनी...

https://youtu.be/txYk946TuoI

अगला लेख: भरी भीड़ में मन बेचारा



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
05 सितम्बर 2020
वो मुझे कहने लगातेरे इश्क़ में बहने लगावक़्त की बात है फिर तुझसे हुई मुलाक़ात हैंकर लेंगे हम आहिस्ता आहिस्ता तुझ पर भी भरोसा अब जो उसका आश खोने लगाहम है तेरे लिए बेशक ग़ैर हैमगर हमें तो आज भी भरोसा है जैसे चाँद को तारों से इश्क़ होने लगा
05 सितम्बर 2020
27 अगस्त 2020
सप्तक के स्वरों की स्थापना सर्वप्रथम महर्षि भरत के द्वारा मानी जातीहै | वे अपने सप्त स्वरों को षड़्ज ग्रामिकस्वर कहते थे | षड़्जग्राम से मध्यम ग्राम और मध्यम ग्राम से पुनः षड़्ज ग्राम में आने के लिये उन्हें दोस्वर स्थानों को और मान्यता देनी पड़ी, जिन्हें ‘अंतर गांधार’ और ‘काकली निषाद’ कहा गया | महर्
27 अगस्त 2020
09 सितम्बर 2020
पुष्प बनकर क्या करूँगी, पुष्प का सौरभ ही दे दो |दीप बनकर क्या करूँगी, दीप का आलोक दे दो ||हर नयन में देखना चाहूँ अभय मैं हर भवन में बाँटना चाहूँ हृदय मैं बंध सके ना वृन्त डाल पात से जो थक सके ना धूप वारि वात से जो भ्रमर बनकर क्या करूँगी, भ्रमर का गुंजार दे दो ||रचना सुनने के लिए कृपया वीडियो देखने क
09 सितम्बर 2020
05 सितम्बर 2020
समय की बहती धारा में कही थम सा गया हूँ मैंअनजानी सी राहों मेंबेचैन ख़यालों में, रुक सा गया हूँ मैंबहती नदी में कही अटक सा गया हूँचलते चलते जो रुक गया हूँ मैं ऐसा लगता है थक गया हूँ मैंकभी सोचता हूँ,यहाँ से निकला तो कहा जाऊंगाशायद डरता हूँ रास्तो के जोखिमों सेजो लहरों स
05 सितम्बर 2020
05 सितम्बर 2020
मैं शब्द रूचि उन बातों की जो भूले सदा ही मन मोले-2अँगड़ाई हूँ मैं उस पथ का जो चले गए हो पर शोले-2हर बूँदो को हर प्यासे तक पहुँचाने का आधार हूँ मैं-2मैं बड़ी रात उन आँखो का जो जागे हो बिना खोलें-2जो कभी नहीं बोला खुल कर वो आशिक़ की जवानी हूँ।-2मीरा की पीर बिना बाँटे राधा के श्याम सुहाने हैं।-2
05 सितम्बर 2020
26 अगस्त 2020
पर्यूषण पर्व चल रहे हैं, और आज भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को भगवान श्री कृष्ण की परा शक्ति श्री राधा जी का जन्मदिवस राधा अष्टमी भी है – सर्वप्रथम सभी को श्री राधाअष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ...गीता गायक भगवान श्री कृष्ण... पर्यूषण पर्व के
26 अगस्त 2020
15 सितम्बर 2020
संस्कृत साहित्य में हिमालय- भारतीयसंस्कृति का प्रतीककुछदिवस पूर्व “हिमालय - अदम्य साधना की सिद्धि का प्रतीक” शीर्षक से एक लेख सुधीजनोंके समक्ष प्रस्तुत किया था | आप सभी से प्राप्त प्रोत्साहन के कारण आज उसी लेख कोकुछ विस्तार देने का प्रयास रहे हैं जिसका भाव यही है कि ह
15 सितम्बर 2020
07 सितम्बर 2020
तु
कल मिलने आइ वो,मेरा पसंदीदा पकवान लाई वो।हम दोनो बहुत सारी बातें किये,उसकी और मेरे नयन ने भी मुलाक़ातें किए।अचानक से पूछी मुझसे.ये बताओ, मुझमे और इश्क़ में क्या अंतर हैं?मैंने कहाँ, तुझमें और तेरे इश्क़ में अंतर है इतना,तु ख़्वाब है और वो है सपना।अब वो नाराज़ हो गईं,रोते-रोते मेरे हाई कँधो पर सो गईं
07 सितम्बर 2020
09 सितम्बर 2020
पुष्प बनकर क्या करूँगी, पुष्प का सौरभ ही दे दो |दीप बनकर क्या करूँगी, दीप का आलोक दे दो ||हर नयन में देखना चाहूँ अभय मैं हर भवन में बाँटना चाहूँ हृदय मैं बंध सके ना वृन्त डाल पात से जो थक सके ना धूप वारि वात से जो भ्रमर बनकर क्या करूँगी, भ्रमर का गुंजार दे दो ||रचना सुनने के लिए कृपया वीडियो देखने क
09 सितम्बर 2020
28 अगस्त 2020
श्रद्धाऔर भक्ति का पर्व श्राद्ध पर्वभाद्रपदशुक्ल चतुर्दशी यानी पहली सितम्बर को क्षमावाणी – अपने द्वारा जाने अनजाने किये गएछोटे से अपराध के लिए भी हृदय से क्षमायाचना तथा दूसरे के पहाड़ से अपराध को भी हृदयसे क्षमा कर देना – के साथ जैन मतावलम्बियों के दशलाक्षण पर्व का समापन होगा |वास्तव में कितनी उदात्त
28 अगस्त 2020
30 अगस्त 2020
एक कहानी - वो काटा“मेम आठ मार्च में दो महीनेसे भी कम का समय बचा है, हमें अपनी रिहर्सल वगैरा शुरू कर देनी चाहिए…”डॉ सुजाता International Women’s Day के प्रोग्राम की बात कर रही थीं |‘जी डॉ, आप फ़िक्र मत कीजिए, आराम से हो जाएगा… आप बस अगले हफ्ते एक मीटिंग बुला लीजिये, बात करते हैं सबसे…” मोबाइल पर बात क
30 अगस्त 2020
03 सितम्बर 2020
☁️⛈️⛅🌥️ 🌈इंद्र सभा 🌈⛅⛈️☁️🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈🌈इंद्र सभा स्वर्ग की धारणा पर आधारित गल्प है।स्वर्ग - नर्क की धारणा धर्मभीरुता- त्रुटिपूर्ण है।। सुकृतों का पलड़ा जब भारी होता है।कहते उस प्राणि को स्वर्ग मिलता है।।कुकृत किये तो नर्क का भागी बनता है।प्रश्न गूढ़! हर मानव दोनों कर्म करता है।।"तारक ब्रह
03 सितम्बर 2020
06 सितम्बर 2020
स्त्री अभिलाषा चाह नहीं मैं क्रूर व्यक्ति,अनपढ़ संग थोपी जाऊं । चाह नहीं पौधे की तरह, जब चाहे जहां रोपी जाऊं ।। चाह नहीं शादी की है, जो दहेज प्रथा में मर जाऊं । चाह नहीं अपने अधिकारों, से वंचित रह जाऊं ।। हम अवला को कुछ और नहीं,
06 सितम्बर 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x