पुष्प का सौरभ ही दे दो

09 सितम्बर 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (448 बार पढ़ा जा चुका है)

पुष्प का सौरभ ही दे दो

पुष्प बनकर क्या करूँगी, पुष्प का सौरभ ही दे दो |

दीप बनकर क्या करूँगी, दीप का आलोक दे दो ||

हर नयन में देखना चाहूँ अभय मैं

हर भवन में बाँटना चाहूँ हृदय मैं

बंध सके ना वृन्त डाल पात से जो

थक सके ना धूप वारि वात से जो

भ्रमर बनकर क्या करूँगी, भ्रमर का गुंजार दे दो ||

रचना सुनने के लिए कृपया वीडियो देखने का कष्ट करें... कात्यायनी...

https://youtu.be/9WKIEJjUrxg

अगला लेख: जीवन भाव भी अभाव भी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
08 सितम्बर 2020
मैं शीश झुकाऊँ मानव कोइस जीवन को मैं केवल सपना क्यों समझूँ,हरभोर उषा की किरण जगाती है मुझको…हरशाम निशा की बाहों में मुस्काता हैचंदा, मस्ती छाती मुझको||रचना सुनने के लिए देखें वीडियो... कात्यायनी...https://youtu.be/txYk946TuoI
08 सितम्बर 2020
04 सितम्बर 2020
शिक्षक दिवसकल पाँच सितम्बर है – शिक्षकदिवस से सम्बन्धित बैठकों, काव्य सन्ध्याओं, साहित्यसन्ध्याओं और अन्य प्रकार के कार्यक्रम आरम्भ हो चुके हैं | सर्वप्रथम सभी कोशिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ...जीवन में प्रगति पथ परअग्रसर होने और सफलता प्राप्त करने के लिए शिक्षा के महत्त्व से कोई भी इन्कारनहीं कर सकता,
04 सितम्बर 2020
15 सितम्बर 2020
संस्कृत साहित्य में हिमालय- भारतीयसंस्कृति का प्रतीककुछदिवस पूर्व “हिमालय - अदम्य साधना की सिद्धि का प्रतीक” शीर्षक से एक लेख सुधीजनोंके समक्ष प्रस्तुत किया था | आप सभी से प्राप्त प्रोत्साहन के कारण आज उसी लेख कोकुछ विस्तार देने का प्रयास रहे हैं जिसका भाव यही है कि ह
15 सितम्बर 2020
17 सितम्बर 2020
आज अमावस्या तिथि है...हम सभी ने अपने पितृगणों को विदा किया है पुनः आगमन की प्रार्थना के साथ...अमावस्या का सारा कार्यक्रम पूर्ण करके कुछ पल विश्राम के लिए बैठे तो मन में कुछविचार घुमड़ने लगे... मन के भाव प्रस्तुत हैं इन पंक्तियों के साथ...भरी भीड़ में मन बेचाराखड़ा हुआ कुछ सहमा कुछसकुचाया साद्विविधाओं क
17 सितम्बर 2020
21 सितम्बर 2020
अभी दो तीन पूर्व हमारी एक मित्र के देवर जी का स्वर्गवास हो गया... असमय...शायद कोरोना के कारण... सोचने को विवश हो गए कि एक महामारी ने सभी को हरा दिया...ऐसे में जीवन को क्या समझें...? हम सभी जानते हैं जीवन मरणशील है... जो जन्माहै... एक न एक दिन उसे जाना ही होगा... इसीलिए जीवन सत्य भी है और असत्य भी...
21 सितम्बर 2020
31 अगस्त 2020
श्राद्ध पक्ष में पाँच ग्रास निकालने का महत्त्वश्रद्धया इदं श्राद्धम्‌ - जोश्रद्धापूर्वक किया जाए वह श्राद्ध है | यद्यपि इस वाक्य की व्याख्या बहुत विशद हो सकतीहै – क्योंकि श्रद्धा तो किसी भी के प्रति हो सकती है | किन्तु यहाँ हम श्राद्धपक्ष के सन्दर्भ में बात कर रहे हैं कि अपने दिवंगत पूर्वजों के निमि
31 अगस्त 2020
08 सितम्बर 2020
मैं शीश झुकाऊँ मानव कोइस जीवन को मैं केवल सपना क्यों समझूँ,हरभोर उषा की किरण जगाती है मुझको…हरशाम निशा की बाहों में मुस्काता हैचंदा, मस्ती छाती मुझको||रचना सुनने के लिए देखें वीडियो... कात्यायनी...https://youtu.be/txYk946TuoI
08 सितम्बर 2020
14 सितम्बर 2020
अभी 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस था और आज हिन्दी दिवस है... हमने अपने सदस्यों सेआग्रह किया क्यों न इस अवसर पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया जाए... तो आज उसीगोष्ठी के साथ आपके सामने उपस्थित हैं... यदि हम ज़ूम पर या किसी भी तरह से ऑनलाइनगोष्ठी करते हैं तो वहाँ कुछ समस्याओं का हमने अनुभव किया है... जिनमें स
14 सितम्बर 2020
07 सितम्बर 2020
पुरुषोत्तममास अथवा अधिक मास आज पितृपक्ष की पञ्चमी तिथि है | 17 सितम्बर को पितृविसर्जनी अमावस्याहै | हर वर्ष महालया से दूसरे दिन यानी आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रआरम्भ हो जाते हैं | किन्तु इस वर्ष ऐसा नहीं हो रहा है | इस वर्ष आश्विन मास मेंमल मास यानी अधिक मास हो रहा है | अर्थात 18 सितम्बर
07 सितम्बर 2020
06 सितम्बर 2020
तू
तु वो बाग़ की कोमल कली हैतुझे तोड़ा अधर्मी वो बली हैजिसे तूने तन मन से माना हैउसने ही तुझे ये पापी दाग़ में साना हैमैं माली हूँ बाग़ से टूटे कली कातु कर भरोसा मेरे साँस कीतेरा छोड़ अब किसका होने वाली हूँतुझे डर किस बात कीदेख मुझे हज़ारों ग़म है फिर भी मतवाली हूँतु छंद है मेरे पंक्तियों की मैं नशा
06 सितम्बर 2020
05 सितम्बर 2020
मैं शब्द रूचि उन बातों की जो भूले सदा ही मन मोले-2अँगड़ाई हूँ मैं उस पथ का जो चले गए हो पर शोले-2हर बूँदो को हर प्यासे तक पहुँचाने का आधार हूँ मैं-2मैं बड़ी रात उन आँखो का जो जागे हो बिना खोलें-2जो कभी नहीं बोला खुल कर वो आशिक़ की जवानी हूँ।-2मीरा की पीर बिना बाँटे राधा के श्याम सुहाने हैं।-2
05 सितम्बर 2020
28 अगस्त 2020
श्रद्धाऔर भक्ति का पर्व श्राद्ध पर्वभाद्रपदशुक्ल चतुर्दशी यानी पहली सितम्बर को क्षमावाणी – अपने द्वारा जाने अनजाने किये गएछोटे से अपराध के लिए भी हृदय से क्षमायाचना तथा दूसरे के पहाड़ से अपराध को भी हृदयसे क्षमा कर देना – के साथ जैन मतावलम्बियों के दशलाक्षण पर्व का समापन होगा |वास्तव में कितनी उदात्त
28 अगस्त 2020
27 अगस्त 2020
सप्तक के स्वरों की स्थापना सर्वप्रथम महर्षि भरत के द्वारा मानी जातीहै | वे अपने सप्त स्वरों को षड़्ज ग्रामिकस्वर कहते थे | षड़्जग्राम से मध्यम ग्राम और मध्यम ग्राम से पुनः षड़्ज ग्राम में आने के लिये उन्हें दोस्वर स्थानों को और मान्यता देनी पड़ी, जिन्हें ‘अंतर गांधार’ और ‘काकली निषाद’ कहा गया | महर्
27 अगस्त 2020
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x