सिंदूर

16 सितम्बर 2020   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (416 बार पढ़ा जा चुका है)

सिंदूर


"सिंदुर''


ब्रह्मरंध नियंत्रण सिंदूर का

पारा करता है।

सुहागन का जीवन

तनाव मुक्त करता है।।

अनिद्रा मुक्त कर श्नायु तंत्र को

चैतन्य रखता है।।

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

परंपरा, धर्म जब ताखे पर रख डाला

ब्रह्मरंध्र का क्या दे फिर मित्र हवाला

नींद गई-सुख-चैन गया- झेलें तुर्रा

चित्त चंचल- स्वप्नों की हलचल

🌊🌊🌊🌊🌊🌊🌊🌊🌊🌊

श्नायु तंत्र सिथील- हाथों में सुरा

आँचल हटाया! एफ. आई. आर.

किया मुस्टण्डा पगड़ी वाला

★☆★☆★☆★☆★☆★

आधुनिकता का रंग गहराया

परंपराओं को सहज बिसराया

🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔

सिंदूर की चर्चा चल रही थी गंभीर

मिला सृजक को- चक्र "परमवीर"

❄️❄️❄️❄️❄️❄️❄️❄️

यूज सिंदूर का हुआ-

आउट औफ फैशन'-

डॉक्टर कहता- असाध्य कैंसर-

मिला बहाना है

शहर में दुर्लभ- गाँवों में

अब भी मांग सजाना है

लधु लकीर हीं सही-

परन्तु यह शुभ चिन्ह है

विश्व-परिवार हमें

मिल- जुल कर बनाना है

चकला-बेलन निपटा

कार्यालय भी जाना है

सहकर्मी बाजू में-

"सिंदूर" देख बतियाना है

सौहार्दपूर्णता उचित-

अंतरंगता से बच जाना है

आ गया नया जमाना पर

मर्यादा पुरजोर निभाना है

यूज सिंदूर का हुआ-

आउट औफ फैशन'-

डॉक्टर कहता- असाध्य कैंसर-

मिला बहाना है


डॉ. कवि कुमार निर्मल


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