बेरोजगारी

18 सितम्बर 2020   |  प्रभात पांडेय   (422 बार पढ़ा जा चुका है)

बेरोजगारी

सरकारें बदलती हैं यहाँ पर

नवयुवकों को आश्वासन देती हैं

झूठे भाषण देती हैं

पर नौकरियां नहीं देती हैं

हर जगह लम्बी हैं कतारें

व्यवस्था में हैं खामियां

बड़बड़ाते हुये घिसट जाती हैं ,देखो कितनी जिन्दगानियाँ

आत्मनिर्भरता का स्वप्न दिखाती

झूठी दिलासाएँ देती है

सब कुछ है कागजों पर

पर नौकरियां नहीं देती हैं

बेरोजगारी का आलम है ऐसा ,लोग कितना तड़प रहे

कल तो बस लिखते थे निबंध इस पर

आज खुद ही इस दौर से गुजर रहे

सरकारें अपनी महिमामण्डन का गीत गा रही

डिग्रियां नवुवकों को बेरोजगार कह कर चिढ़ा रहीं

अधूरे सपनों से लदे इस कंधे पर

काम का बोझ उठा रहीं

बेरोजगारी की इस महामारी में ,विद्वता दम तोड़ रही

मां बाप के सपनों को ये ,पैरों तले रौंद रही

बेशर्मी का आलम देखो

सरकारें इसे ही राम राज्य कह रहीं

देश के इस गम्भीर मुद्दे पर

मीडिया भी चर्चा नहीं कर रही

सोंचती क्यों नहीं सरकारें

भारत कैसे विश्वशक्ति कहलायेगा

यदि यहाँ का युवा बेरोजगार रह जायेगा


अगला लेख: गुरु महिमा



Amit Dixit
18 सितम्बर 2020

बहुत सुन्दर रचना

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x