तुम खुशबू हो तो मैं हवा हूँ

25 सितम्बर 2020   |  सीताराम   (403 बार पढ़ा जा चुका है)

तुम खुशबू हो तो मैं हवा हूँ
तुम भावना हो तो मैं विश्वास हूँ
तुम धड़कन हो तो मैं सांस हूँ
तुम ग़ुलाम हो तो मैं दास हूँ
तुम आसमान हो तो मैं धरती हूँ
तुम कमीज़ हो तो मैं धोती हूँ
तुम लहसुन हो तो मैं पोती हूँ
तुम धैर्य हो तो मैं शांति हूँ
तुम आंदोलन हो तो मैं क्रांति हूँ।

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