समस्या कोई भी हो हमेशा ग़रीब रोता

25 सितम्बर 2020   |  सीताराम   (421 बार पढ़ा जा चुका है)

चारों तरफ लगी है आग
अब तो प्यारे तू जाग
मज़हब के नाम पर लड़ाते
राजनेता जहरील है नाग
बचपन से मीठा जहर पिलाते
हमको लड़ाते और खुद
शांति से शासन करते जाते
गरीबो की इनको चिंता नहीं
इनकी योजनाएँ कागज़ों में

पड़ी है कहीं
थोड़ा सा काम क्या कर दे
विज्ञापनों में दोहराते है वही
इनको मंदिर की पड़ी है
इनको मस्जिद की पड़ी है
मंदिर मस्जिद के बार जो भीख
मांगते उन गरीबो की नहीं पड़ी
क्योंकि वो वोट नहीं देते
सरकारी स्कूल में टीचर नहीं
इनको उनकी नहीं पड़ी
क्योंकि बच्चे वोट नहीं देते
जो वोट देते है उनको भी
अपनी कहाँ पड़ी है
उनको तो मंदिर चाहिए
मस्जिद चाहिए
और अगर कोई सरकार का विरोध कर दे
तो उसको देश द्रोही बोलने का मुद्दा चाहिए
गरीबी का कोई धर्म नहीं होता
समस्या कोई भी हो हमेशा ग़रीब रोता


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