सुनो मंझिलो दौड़ कर हम नहीं आएँगे खुद को तेरे काबिल हम बनाएँगे तेरे मुसाफिर खुद हमें बुलाने मेरा दरवाज़े खटखटाएंगे

25 सितम्बर 2020   |  सीताराम   (396 बार पढ़ा जा चुका है)

सुनो मंझिलो दौड़ कर हम नहीं आएँगे
खुद को तेरे काबिल हम बनाएँगे
तेरे मुसाफिर खुद हमें बुलाने
मेरा दरवाज़े खटखटाएंगे

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25 सितम्बर 2020
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हमेशा मुस्कुराते है ग़लती होने पर भी प्रेम से समझाते हैउनके बारे में क्या कहूँवो तो वह शख़्सियत है जो प्रकृति प्रेमी हैसारे जहाँ को अपना घर मानते है हर बच्चे की प्रतिभा को जानते है उनके दिल में हमेशा होती है माँ उन महापुरुष कानाम है रामकृष्ण शर्मा
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हवा की लहर ने पत्ते को कली से अलग किया सच्चा प्रेम था ,सच्चे प्रेम को एक लहर ने दर्द दिया। ... कली रोती हुई कहती है मुझे में शक्ति थी की मैं चाहती तो अलग ना होती लेकिन पेड़ के प्रति जिम्मेदारियों ने मुझसे मेरा प्रेमी छिन लिया लोग कहते है प्रेम में शक्ति होती है तो कहा गई वो शक्ति क्या प्यार इतना
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17 सितम्बर 2020
आज अमावस्या तिथि है...हम सभी ने अपने पितृगणों को विदा किया है पुनः आगमन की प्रार्थना के साथ...अमावस्या का सारा कार्यक्रम पूर्ण करके कुछ पल विश्राम के लिए बैठे तो मन में कुछविचार घुमड़ने लगे... मन के भाव प्रस्तुत हैं इन पंक्तियों के साथ...भरी भीड़ में मन बेचाराखड़ा हुआ कुछ सहमा कुछसकुचाया साद्विविधाओं क
17 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
जब तुम मुस्कराते हो तो मुरझाए फूल खिल जाते है हवाएँ ठंडी हो जाती है पर्वत झुक जाते है नदियाँ गीत गाती है चिड़िया नृत्य करती है पगडंडी पर घास फैल जाती है अंधेरा खुद को समेट लेता है सूरज अपनी किरणों को बड़ा देता है सागर लहरों को नीचे कर लेता है दरिया गड्डो को जल से भर देता है तेरे मुस्कुराने से जो नही
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
होने दो हवा को चलने दो बारिश को आने दो शेर को खाने दो जो हो रहा होने दो बादल बनेंगे बिगड़ेंगे तूफान आयेगा जाएगा मुझे इससे क्या लेना जो हो रहा होने दो कोई भूख से रोता है तो कोई अन्याय से तो क्या ?इनको रोने दो जो हो रहा है होने दो किसी को वोट की पड़ी है तो किसी को देश भक्ति की बाढ़ से किसी
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
चले कदम तेरी और पहुँच नहीं हुआ भोर तेरे पास जान से क्यों रुक जाते है पैर प्रेम से उनको क्या है बेर तेरा मुझसे होना दूरबताओ मेरा क्या था कसूर यह जिंदगी एक पहली है क्या यार प्रेम के दुश्मनों के हाथों में है तलवार आँखें यह तुझे ही ढूंढे हर जगहा हर बार तेरा भूत मुझे पर होने लगा है अब सवार पत्थर दिल क
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25 सितम्बर 2020
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अभी 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस था और आज हिन्दी दिवस है... हमने अपने सदस्यों सेआग्रह किया क्यों न इस अवसर पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया जाए... तो आज उसीगोष्ठी के साथ आपके सामने उपस्थित हैं... यदि हम ज़ूम पर या किसी भी तरह से ऑनलाइनगोष्ठी करते हैं तो वहाँ कुछ समस्याओं का हमने अनुभव किया है... जिनमें स
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