अंत जिंदगी का आरंभ ?

08 अक्तूबर 2020   |  सीताराम   (403 बार पढ़ा जा चुका है)

तुम्हें नहीं लगता हम यूँ ही दुःखी है
सब ठीक होने पर भी जिंदगी रुखी है
मैं कौन हूँ ?,
मैं क्या हूँ? ,
कहाँ जाना है? ,
मेरा लक्ष्य क्या है ?
यह सवाल मैं खुद
से करता था
लेकिन आज वक्त बदल गया है
आज खुद के लिए वक्त नहीं है
हाथ में घड़ी है
लेकिन खुद के हाथ में एक घड़ी पल नहीं है
क्यों क्या हम यहां सुविधा भोगने के लिए आये है?
या पिंडी चलाने के लिए ?
या दुःखी होने के लिये ?
क्या कभी हम खुद से बढ़कर कुछ विचारते है ?
पता नहीं ?
क्या मृत्यु जिंदगी का अंत है ?
या अंत जिंदगी का आरंभ ?

अगला लेख: जो खुद से प्रेम नहीं करता वो दूसरों से क्या प्रेम करेगा ?



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
25 सितम्बर 2020
जब तुम मुस्कराते हो तो मुरझाए फूल खिल जाते है हवाएँ ठंडी हो जाती है पर्वत झुक जाते है नदियाँ गीत गाती है चिड़िया नृत्य करती है पगडंडी पर घास फैल जाती है अंधेरा खुद को समेट लेता है सूरज अपनी किरणों को बड़ा देता है सागर लहरों को नीचे कर लेता है दरिया गड्डो को जल से भर देता है तेरे मुस्कुराने से जो नही
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
तुम खुशबू हो तो मैं हवा हूँ तुम भावना हो तो मैं विश्वास हूँ तुम धड़कन हो तो मैं सांस हूँ तुम ग़ुलाम हो तो मैं दास हूँ तुम आसमान हो तो मैं धरती हूँ तुम कमीज़ हो तो मैं धोती हूँ तुम लहसुन हो तो मैं पोती हूँ तुम धैर्य हो तो मैं शांति हूँ तुम आंदोलन हो तो मैं क्रांति हूँ।
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
हवा की लहर ने पत्ते को कली से अलग किया सच्चा प्रेम था ,सच्चे प्रेम को एक लहर ने दर्द दिया। ... कली रोती हुई कहती है मुझे में शक्ति थी की मैं चाहती तो अलग ना होती लेकिन पेड़ के प्रति जिम्मेदारियों ने मुझसे मेरा प्रेमी छिन लिया लोग कहते है प्रेम में शक्ति होती है तो कहा गई वो शक्ति क्या प्यार इतना
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
आँखो में तेरे नूर है जब से तुझे देखा है मेरे दिल में तेरा ही तेरा चढ़ा सुरूर है बड़ी बड़ी अखिया है रब ने तेरे होठों पर रखी खुशीयाँ है...
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
क्या हो रहा है चित्त कहा खो रहा है खिले हुए फूल मुझे बुलाते है यह पेड़ पौध कुछ कहना चाहते है हवाए मुझे कुछ सुना रही है कानो के पास आकर गुन गुना रही है यह पक्षी ,यह अंबर ,यह जल की बुँदे चीटियों के झुंड रात में चमकते तारे बारिश में चलती बहारेयह पठार यह मिट्टी ,छिपकली मछर मक्खी मोबाइल मोमबत्ती जैसे मे
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
दो फूल खिले है एक इस किनारे दूसरा उस किनारे बीच में नदी पड़ती है इसने उसको देखा नहीं उसने इसको देखा नहीं सपने में कल्पना करते है वो खुशबू वाला कौन है? रहता कहाँ है ?कैसा होगा ?क्या हम कभी मिल पाएंगे ?किनारा पार कर पाएंगे?यहाँ जीवन भर अपना प्रेम खुसबू से ही फैलाते रहेंगे
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
आँखो में तेरे नूर है जब से तुझे देखा है मेरे दिल में तेरा ही तेरा चढ़ा सुरूर है बड़ी बड़ी अखिया है रब ने तेरे होठों पर रखी खुशीयाँ है...
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
तू मिला सब कुछ नष्ट हो गया है फिर भी एक दीप जला है बंजर भूमि में आशा का एक पेड़ खिला है डूबते को जैसे मिलता एक तिनके का सहारा वैसे ही मुझको तू मिला है ...
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
चारों तरफ लगी है आग अब तो प्यारे तू जाग मज़हब के नाम पर लड़ाते राजनेता जहरील है नाग बचपन से मीठा जहर पिलाते हमको लड़ाते और खुद शांति से शासन करते जाते गरीबो की इनको चिंता नहीं इनकी योजनाएँ कागज़ों में पड़ी है कहीं थोड़ा सा काम क्या कर दे विज्ञापनों में दोहराते है वही इनको मंदिर की पड़ी है इनको मस्जिद
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
क्या हो रहा है चित्त कहा खो रहा है खिले हुए फूल मुझे बुलाते है यह पेड़ पौध कुछ कहना चाहते है हवाए मुझे कुछ सुना रही है कानो के पास आकर गुन गुना रही है यह पक्षी ,यह अंबर ,यह जल की बुँदे चीटियों के झुंड रात में चमकते तारे बारिश में चलती बहारेयह पठार यह मिट्टी ,छिपकली मछर मक्खी मोबाइल मोमबत्ती जैसे मे
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
होने दो हवा को चलने दो बारिश को आने दो शेर को खाने दो जो हो रहा होने दो बादल बनेंगे बिगड़ेंगे तूफान आयेगा जाएगा मुझे इससे क्या लेना जो हो रहा होने दो कोई भूख से रोता है तो कोई अन्याय से तो क्या ?इनको रोने दो जो हो रहा है होने दो किसी को वोट की पड़ी है तो किसी को देश भक्ति की बाढ़ से किसी
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
हमेशा मुस्कुराते है ग़लती होने पर भी प्रेम से समझाते हैउनके बारे में क्या कहूँवो तो वह शख़्सियत है जो प्रकृति प्रेमी हैसारे जहाँ को अपना घर मानते है हर बच्चे की प्रतिभा को जानते है उनके दिल में हमेशा होती है माँ उन महापुरुष कानाम है रामकृष्ण शर्मा
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
तुम खुशबू हो तो मैं हवा हूँ तुम भावना हो तो मैं विश्वास हूँ तुम धड़कन हो तो मैं सांस हूँ तुम ग़ुलाम हो तो मैं दास हूँ तुम आसमान हो तो मैं धरती हूँ तुम कमीज़ हो तो मैं धोती हूँ तुम लहसुन हो तो मैं पोती हूँ तुम धैर्य हो तो मैं शांति हूँ तुम आंदोलन हो तो मैं क्रांति हूँ।
25 सितम्बर 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x