अभिनव मिश्र

11 अक्तूबर 2020   |  अभिनव मिश्र"अदम्य"   (435 बार पढ़ा जा चुका है)

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हरिगीतिका छन्द,2212 2212 2, 212 2212हे! मात! नत मस्तक नमन नित,वन्दना कात्यायनी।अवसाद सारे नष्ट कर हे, मात! मोक्ष प्रदायनी।हे! सौम्य रूपा चन्द्र वदनी, रक्त पट माँ धरिणी।हे! शक्तिशाली नंदिनी माँ, सिंह प्रिय नित वाहिनी।माथे मुकुट है स्वर्ण का शुभ, पुष्प कर में धारिणी।हे! मात!नत मस्तक नमन नित,वन्दना कात
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दु
विधा-लावड़ी महंगाई की इस दुनिया में, दुःखित कृषक है बेचाराबदल गयी ये दुनियां देखो, बदला है जीवन सारा उठे अंधेरे प्रात सवेरे डोर हाँथ ले बैलों कीफसल उगाने की चाहत मेंचाल लगा दी खेतों कीन धूप से वो विचलित होतेन छांव की चाहत भरतेकरे परिश्रम कठिन हमेशासदा सभी ऋतुएँ सहतेकठिन परस्थिति में किसान तो, कर लेता
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