फौजी

11 अक्तूबर 2020   |  सीताराम   (404 बार पढ़ा जा चुका है)

नशा है हमें तिरंगे में लिपटकर घर आने का
अपने खून से तिरंगा सजाने का
अपने देश के लिए अपनी जान गवाने का
भारत माँ कि आन बान शान के लिए
किसी से भी लड़ जाने का
नशा है हमें तिरंगे में लिपटकर घर आने का।



अगला लेख: करियर



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
07 अक्तूबर 2020
मु
गर्दन को पकड़ कर जल में कोई डुबो रहा है और मैं छटपटा रहा हूँ छोड़ दो मुझे प्लीज़ - चिल्ला रहा हूँ। . करियर का दबाव जवानी का दबाव फैमिली का दबाव यह तीनों दबाव मुझे जल में डुबो रह है और में करा रहा हूँ कैसे करूँ में तीनों का मुकाबला।।
07 अक्तूबर 2020
11 अक्तूबर 2020
चाहतीहूँ ,उकेरना ,औरत के समग्र रूपको, इस असीमित आकाश में !जिसके विशालहृदय में जज़्बातों का अथाह सागर,जैसे संपूर्ण सृष्टि कीभावनाओं का प्रतिबिंब !उसकेव्यक्तित्व कीगहराई में कुछ रंग बिखर गए हैं । कहींव्यथा है ,कहीं मानसिक यंत्रणा तो कहींआत्म हीनता की टीस लिए!सदियोंसे आज
11 अक्तूबर 2020
10 अक्तूबर 2020
प्रेमबन जाएगाध्यानप्रेम, एकऐसा अनूठा भाव जिसका न कोई रूप न रंग... जो स्वतः ही आ जाता है मन के भीतर...कैसे... कब... कहाँ... कुछ नहीं रहता भान... हाँ, करने लगे यदिमोल भाव... तो रह जाना होता है रिक्त हस्त... इसी प्रकार के कुछ उलझे सुलझे से भावहैं हमारी आज की रचना में... जो प्रस्तुत है सुधी पाठकों के लि
10 अक्तूबर 2020
01 अक्तूबर 2020
टू
तुम्हें पता है मेरा दिल तब टूट गया था जब तुमने यह मुस्कराकर कहाँ अब हमारे बीच में कोई रिश्ता नहीं सब भूल जाओ
01 अक्तूबर 2020
16 अक्तूबर 2020
16 अक्तूबर 2020
20 अक्तूबर 2020
करियर चौराहे पर बैठामैं रास्तों को गिन रहा कभी रास्ते को नापता ,तो कभी चुपके से रास्तों में झांकता जाना तो मुझे करियर बनाने को है लेकिन यह रास्तेयह संकट मुसीबतें मुझे रोकने के लिए लगातार ताक रहे हैहर रास्ते में एक घोड़ा लिए बुद्धिमान खड़े हैसबके पास दिखाने को प्रमाण है यह देखिए जनाब हमारे घोड़े पर
20 अक्तूबर 2020
08 अक्तूबर 2020
अपना क्या है कभीकभी यों ही दार्शनिक सा बना मन सोचने लगता है कि इस असत् जगत में उसका है क्या...?जो कुछ है वो सब उसी का तो दिया हुआ है... कुछ इसी तरह के उलझे सुलझे से विचारोंके साथ प्रस्तुत है हमारी आज की रचना... अपना क्या है... सुनने के लिए कृपयावीडियो पर जाएँ... धन्यवाद... कात्यायनी... https://youtu
08 अक्तूबर 2020
30 सितम्बर 2020
हार गई वह नारी अपराधों के बोझ से मेरा अपना कौन है इस खोज से किस पर विश्वास करूं किस पर नहीं इस सोच से बस नारी पैदा हुई इस दोष से घर और समाज के शोषण से असमानता के कुपोषण से विज्ञापनों में उपभोग कि वस्तु बना देने से न्याय नहीं मिल पाने से बुरे को अच्छा समझने की भूल से हार गई वह नारी अपराधों के बोझ स
30 सितम्बर 2020
13 अक्तूबर 2020
स्नेह बिना जीवन वास्तव में सूना है...स्नेह चाहे मित्र का हो... जीवन साथी का हो... ईश्वर के प्रति हो... स्नेहदान सेही जीवन ज्योति प्रज्वलित रहती है... तथा जीवन का पथ प्रकाशमान बना रहता है... कुछइसी प्रकार के उलझे सुलझे से भावों के साथ प्रस्तुत है हमारी आज की रचना,,, सोने से पहले कुछ गा दो...कात्यायनी
13 अक्तूबर 2020
08 अक्तूबर 2020
वो एकतरफा प्यार ,जिसके लिये हुआ दिल बेक़रार मैं ढूंढता रहा उसे ,होकर बेक़रार उसका मुस्कुराना देखकर आँखों का झुकना देखकर उसके आगे लगने लगे महखाने सारे बेअसर वो जाते जिधर जिधर मैं पहुंचता उधर उधर जैसे मृग कस्तूरी के लिए ,भटके इधर उधर अब तो दिन कटता था ,रस्ता उनका देखकर उनसे मिलने का मौका ढूंढता था ,दिल
08 अक्तूबर 2020
28 सितम्बर 2020
मैं आपके समाज का भाग हूँ आपके शब्दों का मैं राग हूँ रूप देखकर रिश्ता ना तोड़ो भावनाओं से रिश्ता तुम जोड़ो सात बहनों की पुत्री हूँ उस दुःख से मैं गुजरी हूँ गलत हमको कहते हो तमीज से नहीं रहते हो भेदभाव क्यों करते हो मार पिट कर लहू लुहान करते हो हमको देख कर घूरते हो चीनी समझ कर फेफुरते हो क्यों हमें दिल
28 सितम्बर 2020
01 अक्तूबर 2020
तु
तुम बताओ कैसे भूल जाऊँ तुझे जिसने प्यार का अर्थ बताया मुझे //
01 अक्तूबर 2020
13 अक्तूबर 2020
लो
लोट आओ है गाँधी तेरा भारत तुझे पुकारे स्वराज का सपना अधूरा स्वराज के दुलारे।
13 अक्तूबर 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x