सर्वदा नमन है माँ तुमको

12 अक्तूबर 2020   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (413 बार पढ़ा जा चुका है)

सर्वदा नमन है माँ तुमको

जीवन में अनगिनती पल ऐसे आते हैं जब माता पिता की याद अनायास ही मुस्कुराने को विवश कर देती है | ऐसा ही कुछ कभी कभी हमारे साथ भी होता है | माँ क्या होती है – इसके लिए तो वास्तव में शब्द ही नहीं मिल पाते | माँ की जब याद आती है तो बस इतना ही मन करता है:

माँ तेरी गोदी में सर रख सो जाऊँ मैं पल भर को, तो

लोरी तू गा देना, दिल को कुछ तो राहत मिल जाएगी ।

तेरे आँचल की छाया से है बढ़कर नहीं कोई भी सुख,

जो तेरा हाथ रहे सर पर मंज़िल मुझको मिल जाएगी...

कुछ इसी प्रकार के भावों से युक्त है हमारी आज की रचना... “सर्वदा नमन है माँ तुमको...” कात्यायनी...

सताती है तुम्हारी याद हर पल – प्रतिपल

काश एक बार फिर तुम्हारी गोदी में सर रखकर सो पाती

बालों में फिराती तुम अपनी खुरदुरी अँगुलियों में प्यार की स्निग्धता भर…

न जाने कितने आँसू छिपाए अपने दामन में

पर बना लेती उन्हीं आँसू की बूँदों को अमृत रस धारा…

मेरी हर आवश्यकता पूर्ण होती थी तुम्हीं से

क्योंकि तुम ही थीं मेरे जीवन का सत्य,

मैं तो मात्र तुम्हारी छाया हूँ

बिना तुम्हारे होता क्या अस्तित्व मेरा...

घोर निराशा जो मन को उद्विग्न बनाती

तुम आशा दीप जलाए सदा सम्मुख होतीं...

मेरी हर धड़कन की लय में तुम गीत बनीं घुल मिल जातीं...

मेरे दुःख में, मेरे सुख में, तुम सदा साथ मेरे रहतीं…

स्नेह त्याग और एकनिष्ठता की साक्षात प्रतिमूर्ति तुम

राह भटक जाने पर स्नेहिल बाँहों में थाम

प्रयासरत रहतीं मुझे सही मार्ग दिखाने को

बन जातीं खुद दीपक / करने को प्रकाशित करतीं मेरी राहें…

मैं कभी अगर बैठ जाती थक कर

तब साथ चलतीं तुम साहस बनी

भर लेतीं मेरे मग के हर कंटक को आँचल में अपने…

तुमने ही तो सौन्दर्य दिया मिट्टी की इस काया को

सींच कर अपनी ममता से…

नहीं चुका सकती क़र्ज़ तुम्हारा / क्योंकि जानती हूँ

अभी भी नहलाती हो तुम अपने आशीषों से

दूर गगन में बैठी / झाँकती हुई तारों के मध्य से…

साथ न होते हुए भी कराती हो अहसास

स्नेहमयी उपस्थिति का अपनी

क्योंकि समाई हुई हो तुम मुझमें ही…

जीवन के मधुर पलों की पुनरावृत्ति तुम

अपरिमित नेह सुगन्ध लिए निज आँचल में

प्रवाहित करती रहती हर पल अपनी ममता की अमृत धरा

लुटाती रहती हो शक्ति और करुणा हर पल

बिना किसी प्रतिदान की अपेक्षा के / बिना माप तौल किये

बस बरसाती जाती हो स्नेह जल

कोटि कोटि नमन है माँ तुमको… सदा सर्वदा नमन तुमको…

_____________कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा

अगला लेख: आत्मतत्त्व से ही समस्त चराचर की सत्ता



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
01 अक्तूबर 2020
नमस्कार... स्वागत है आज आप सबका WOW India के आओ कुछबात करें कार्यक्रम में... आज एक बार फिर से एक छोटी सी काव्य गोष्ठी... अभी तीनदिन पूर्व बिटिया दिवस था... हमारी कुछ सदस्यों ने बिटिया और नारी के विविध रूपोंपर कुछ रचनाएँ रचीं और उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग्स हमें भेजीं,जिन्हें हमने काव्य गोष्ठी के रूप में
01 अक्तूबर 2020
21 सितम्बर 2020
अभी दो तीन पूर्व हमारी एक मित्र के देवर जी का स्वर्गवास हो गया... असमय...शायद कोरोना के कारण... सोचने को विवश हो गए कि एक महामारी ने सभी को हरा दिया...ऐसे में जीवन को क्या समझें...? हम सभी जानते हैं जीवन मरणशील है... जो जन्माहै... एक न एक दिन उसे जाना ही होगा... इसीलिए जीवन सत्य भी है और असत्य भी...
21 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
हि
हिंदी दिवस पर विशेष___ *प्रतियोगिता हेतु* *मातृभाषा,हिन्दी* *हास्य,कविता* 🥦🥦🥦🥦🥦🥦🥦🥦🥦🥦🥦🥦 देश हमारा उन्नति पर है, सब अंग्रेजी बतलाते हैं ।हिंदुस्तान के युवा हिंदी, अब कहते भी शर्माते है ।🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷कविता हो या छन्द-वन्दना,
23 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
हम अक्सर दूसरों को उपदेश देते हैं कि हमें अपने अहंकार को नष्टकरना चाहिए, हमें अपने क्रोध पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए | सही बात है, ऐसा होना चाहिए यदि जीवन में सुख और शान्तिकी अभिलाषा है | लेकिन हम इन आदर्शों को स्वयं के जीवन मेंकितना उतार पाते हैं सोचने वाली बात यह है | देखा जाए तोकर्म
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
तुम खुशबू हो तो मैं हवा हूँ तुम भावना हो तो मैं विश्वास हूँ तुम धड़कन हो तो मैं सांस हूँ तुम ग़ुलाम हो तो मैं दास हूँ तुम आसमान हो तो मैं धरती हूँ तुम कमीज़ हो तो मैं धोती हूँ तुम लहसुन हो तो मैं पोती हूँ तुम धैर्य हो तो मैं शांति हूँ तुम आंदोलन हो तो मैं क्रांति हूँ।
25 सितम्बर 2020
02 अक्तूबर 2020
आज दो अक्टूबर है - राष्ट्रपिता महात्मागाँधी और जय जवान जय किसान का नारा देने वाले श्री लाल बहादुर शास्त्री जी काजन्मदिवस... गाँधी जी और शास्त्री जी दोनों ही मौन के समर्थक और साधक थे... बापूके तो कहना था मौन एक ईश्वरीय अनुकम्पा है, उससे मुझे आन्तरिक आनन्द प्राप्त होता है...वास्तव में सब कुछ मौन हो नि
02 अक्तूबर 2020
25 सितम्बर 2020
सारा जहाँ प्रेम का भूखा है जहां मिला वहां झुका है जो खुद से प्रेम नहीं करता वो दूसरों से क्या प्रेम करेगा ?जो खुद का ज़ख्म नहीं भरसकता वो दूसरों का क्या भरेगा ?जो खुद खुश नहीं रह सकतावो दूसरों को खुश रखने का वादा करेगा खुशी खुद में है यह ढूढ़ने का ना इरादा करेगाजो खुद से प्रेम नहीं करता वो दूसरों से क
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
चारों तरफ लगी है आग अब तो प्यारे तू जाग मज़हब के नाम पर लड़ाते राजनेता जहरील है नाग बचपन से मीठा जहर पिलाते हमको लड़ाते और खुद शांति से शासन करते जाते गरीबो की इनको चिंता नहीं इनकी योजनाएँ कागज़ों में पड़ी है कहीं थोड़ा सा काम क्या कर दे विज्ञापनों में दोहराते है वही इनको मंदिर की पड़ी है इनको मस्जिद
25 सितम्बर 2020
25 सितम्बर 2020
हवा की लहर ने पत्ते को कली से अलग किया सच्चा प्रेम था ,सच्चे प्रेम को एक लहर ने दर्द दिया। ... कली रोती हुई कहती है मुझे में शक्ति थी की मैं चाहती तो अलग ना होती लेकिन पेड़ के प्रति जिम्मेदारियों ने मुझसे मेरा प्रेमी छिन लिया लोग कहते है प्रेम में शक्ति होती है तो कहा गई वो शक्ति क्या प्यार इतना
25 सितम्बर 2020
24 सितम्बर 2020
गीता औरदेहान्तरप्राप्तिश्राद्ध पक्ष में श्रद्धा के प्रतीक श्राद्ध पर्व काआयोजन प्रायः हर हिन्दू परिवार में होता है | पितृविसर्जनीअमावस्या के साथ इसका समापन होता है और तभी से माँ दुर्गा की उपासना के साथ त्यौहारोंकी श्रृंखला आरम्भ हो जाती है – नवरात्र पर्व, विजयादशमी,शरद पूर्णिमा आदि करते करते माँ लक्
24 सितम्बर 2020
23 सितम्बर 2020
राहु केतु का वृषभ और वृश्चिकमें गोचरअभी कुछही देर पहले राहु केतु का राशि परिवर्तन हुआ है | यद्यपि कोरोना जैसी महामारी केकारण विश्व भर में सभी क्षेत्रों में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है और जनसाधारण में भय भी व्याप्त है कि कब और कैसे इस आपदा से मुक्ति प्राप्त होगी | लेकिनघबराने की आवश्यकता नहीं है,
23 सितम्बर 2020
27 सितम्बर 2020
शुक्र का सिंह में गोचर कोरोना महामारी का प्रकोप अभी भी थमानहीं है, किन्तु जन जीवन धीरे धीरे पटरी पर लौटने का प्रयास आरम्भकर रहा है – कुछ निश्चित और विशेष सावधानियों के साथ | इसी स्थिति में कल सोमवार, अधिक आश्विन शुक्ल द्वादशी को अर्द्धरात्र्योत्तर एक बजकर तीन मिनट केलगभग बव करण और धृति योग में समस्त
27 सितम्बर 2020
08 अक्तूबर 2020
अपना क्या है कभीकभी यों ही दार्शनिक सा बना मन सोचने लगता है कि इस असत् जगत में उसका है क्या...?जो कुछ है वो सब उसी का तो दिया हुआ है... कुछ इसी तरह के उलझे सुलझे से विचारोंके साथ प्रस्तुत है हमारी आज की रचना... अपना क्या है... सुनने के लिए कृपयावीडियो पर जाएँ... धन्यवाद... कात्यायनी... https://youtu
08 अक्तूबर 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x