मुस्कराते ही रहना...

13 अक्तूबर 2020   |  मदन पाण्डेय 'शिखर'   (423 बार पढ़ा जा चुका है)

सदा मुस्कराते ही रहना,


तुम इसी तरह बस सदा मुस्कराते ही रहना,

दुनियां का काम तो बस कहते ही रहना


बहुत डराती हैं ये छिपकली,और ये मकड़ियाँ,

तितलियों का काम तो बस, उड़ते ही रहना।


पलकों तले आंसूओं का एक घरोंदा होता है,

दिल का एक काम बस धड़कते ही रहना।


कहते हैं ये मंज़िलें इम्तहान लिया करती हैं,

मुसाफ़िर का काम तो बस चलते ही रहना।


कभी शाम हो जाये, और रास्ता गुम होने लगे,

जुगनुओं की तरह, उड़ते, मचलते ही रहना ।


मदन पाण्डेय 'शिखर'




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