माँ है हिंदी

14 अक्तूबर 2020   |  सीताराम   (421 बार पढ़ा जा चुका है)

तेरी सुंदरता और भी बढ़ जाती है
जब माथे पर लगी होती है बिंदी
निकालने वाले तो चाँदनी की भी
निकालते है चिंदी
कलम भी गर्व महसूस करती है
जब कागज पर लिखते है हिंदी
हिंदी के शब्द सुनकर तो
प्राचीन काल में मोहिनी हुई थी जिंदी
संस्कृत की पुत्री है सिंधी की बहन
मेरी मात्र भाषा और मेरी माँ है हिंदी। .

कवि -सीताराम रावत

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