मधुमास गीत

19 अक्तूबर 2020   |  अभिनव मिश्र"अदम्य"   (424 बार पढ़ा जा चुका है)

मधुमास गीत

गीत

मधुमास के दिनों की, कुछ याद आ रही है।

महकी हुई फिजाएं, मनको लुभा रही है।


जब फूल-फूल तितली, खुशबू बिखेरती थी।

महकी हुई हवाएं, संवाद छेड़ती थी।

कोयल सदा वनों में, हैं राग प्रीत गाये।

मौसम वही सुहाना, मुझको सदा लुभाये।

महकी हुई धरा मन, मेरा लुभा रही है।

मधुमास के दिनों की, कुछ याद आ रही है।


भौंरे कली-कली पर, है राग गीत गाते।

मन में उमंग उसकी, वो सर्द अंत आते।

वो फूल देख सरसों, दिल ने उछाल मारी।

श्रृंगार आज सुंदर, लिख दूँ नई खुमारी।

हर डाल पेड़ पौधे, कलियाँ खिला रही हैं।

मधुमास के दिनों की, कुछ याद आ रही है।


चलती बयार ऐसी, कुछ तान छेड़ती हो।

लगती बहार मन में, रस राग घोलती हो।

देखो मिठास दिल में, मधुमास की भरी है।

है डाल-डाल मंजरी, हर आम की भरी है।

प्यारा"अदम्य" को कुछ, मधुमास लग रही है।

मधुमास के दिनों की, कुछ याद आ रही है।


■अभिनव मिश्र"अदम्य

अगला लेख: मेरे प्यारे पापा



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
02 नवम्बर 2020
19 अक्तूबर 2020
19 अक्तूबर 2020
11 अक्तूबर 2020
24 अक्तूबर 2020
02 नवम्बर 2020
11 अक्तूबर 2020
11 अक्तूबर 2020
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x