मधुमास गीत

19 अक्तूबर 2020   |  अभिनव मिश्र"अदम्य"   (421 बार पढ़ा जा चुका है)

मधुमास गीत

गीत

मधुमास के दिनों की, कुछ याद आ रही है।

महकी हुई फिजाएं, मनको लुभा रही है।


जब फूल-फूल तितली, खुशबू बिखेरती थी।

महकी हुई हवाएं, संवाद छेड़ती थी।

कोयल सदा वनों में, हैं राग प्रीत गाये।

मौसम वही सुहाना, मुझको सदा लुभाये।

महकी हुई धरा मन, मेरा लुभा रही है।

मधुमास के दिनों की, कुछ याद आ रही है।


भौंरे कली-कली पर, है राग गीत गाते।

मन में उमंग उसकी, वो सर्द अंत आते।

वो फूल देख सरसों, दिल ने उछाल मारी।

श्रृंगार आज सुंदर, लिख दूँ नई खुमारी।

हर डाल पेड़ पौधे, कलियाँ खिला रही हैं।

मधुमास के दिनों की, कुछ याद आ रही है।


चलती बयार ऐसी, कुछ तान छेड़ती हो।

लगती बहार मन में, रस राग घोलती हो।

देखो मिठास दिल में, मधुमास की भरी है।

है डाल-डाल मंजरी, हर आम की भरी है।

प्यारा"अदम्य" को कुछ, मधुमास लग रही है।

मधुमास के दिनों की, कुछ याद आ रही है।


■अभिनव मिश्र"अदम्य

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