मेरे प्यारे पापा

19 अक्तूबर 2020   |  अभिनव मिश्र"अदम्य"   (410 बार पढ़ा जा चुका है)

मेरे प्यारे पापा


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विधाता छन्द1222 1222 1222 1222सुनो माता महागौरी, यही अरदास लाया हूँ।मिले दर्शन मुझे मैया, लिए इक आस आया हूँ।करूँ गुणगान मैं तेरा, चढ़ाऊँ पुष्प माला माँ।करो उद्धार अब मेरा, कृपा कर दृष्टि डालो माँ।तुम्हीं लक्ष्मी तुम्हीं दुर्गा, तुम्हीं तो मात! काली हो।दुखी जो द्वार पर आये, न जाए हाथ खाली वो।करे जो मा
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कविता क्या है?सुबह के सूर्य से लेकर, निशा का चाँद है कविताभरे रस छन्द हो जिसमें, वही इक स्वाद है कविताविरह की वेदना संवेदना श्रंगार है कविताभरी जो भावना उर में, वही उद्गार है कवितालिखी जो पन्त दिनकर ने, ह्रदय का प्यार है कविताभरे जो दर्द घावों को, वही उपचार है कविताकड़ी सी धूप में मिलती, वही इक छांव
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