कोरोना की काली भयावह रात

24 अक्तूबर 2020   |  अशोक सिंह 'अक्स'   (423 बार पढ़ा जा चुका है)

कोरोना की काली भयावह रात

कोरोना की वो काली भयावह रात

माना कि आज है कोरोना की काली भयावह रात
दरअसल मिली है अपने कट्टर पड़ोसी से सौगात
यूँ ही कोई देता है अर्जित अपनी थाती व विरासत
सच पूछो तो ये है करनी यमराज के साथ मुलाक़ात..।

नींद भी आती नहीं, आते नहीं सपनें
बेसब्री बढ़ती जाती है याद आते हैं अपनें
समाचारपत्रों में पढ़कर भयावहता की खबरें
दम फूलने लगा है और सांस उखड़ने लगें हैं..।

मास्क पहन-पहनकर ऑक्सिजन घटने लगा
ये क्या धुंकनी सी चलने लगी और मैं खाँसने लगा
एम्बुलेंस वाले आए और मुझे उठाकर ले जाने लगे
हाथ जोड़ा गिड़गिड़ाया पर सभी कन्नी काटने लगे..।

सगे संबंधी और दोस्त यार कोई भी पास नहीं आया
बस उसी क्षण छूट गया इस दुनिया से सारी मोहमाया
अस्पताल में भर्ती हुआ हकीकत में बस थोड़ा सर्दी हुआ
परिजन तो यूँ घबराए जैसे कभी लौट के ना आए...।

ऐसा लगता जैसे सभी करते हों बस चल बसने का इंतज़ार
दूसरी तरफ अस्पताल में चल रहा था कमाई का व्यापार
सच मानों, कोरोना ने मनुष्य को उसकी औकात दिखा दिया
दरअसल जीवन के असली रूप से मुलाकात करवा दिया..।

इत्तेफ़ाक से दुबारा घर लौटकर आने का सौभाग्य जो मिला
कॉलोनी वालों का दूर से ही छुआछूत वाला प्यार जो मिला
एम्बुलेंस से निकलते ही जनसमूह ने पुष्प वर्षा क्या किया
आँखों से आँसू निकल आए स्वागत करताल से ज्यों किया..।

मैंनें भी कसम खा लिया अब किसी से हाथ न मिलाऊँगा
अब दूर - दूर से ही मैं राम - राम चिल्लाऊँगा
मैंनें भी ठान लिया अब किसी को भी घर न बुलाऊँगा
मोबाईल फोन पर ही मैं अब अतिथि धर्म निभाऊँगा..।

➖ अशोक सिंह
☎️ 9867889171
#स्वरचित_हिंदीकविता
#पागल_पंथी_का_जुनून

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