कविता क्या है?

02 नवम्बर 2020   |  अभिनव मिश्र"अदम्य"   (485 बार पढ़ा जा चुका है)

कविता क्या है?

कविता क्या है?

सुबह के सूर्य से लेकर, निशा का चाँद है कविता

भरे रस छन्द हो जिसमें, वही इक स्वाद है कविता


विरह की वेदना संवेदना श्रंगार है कविता

भरी जो भावना उर में, वही उद्गार है कविता


लिखी जो पन्त दिनकर ने, ह्रदय का प्यार है कविता

भरे जो दर्द घावों को, वही उपचार है कविता


कड़ी सी धूप में मिलती, वही इक छांव है कविता

पढ़े कोई कभी इसको, मिले जो चाव है कविता


बहे जो नैन से आंसू, उसी का सार है कविता

जुड़े जब शब्द श्रेणी में, वही आकार है कविता


रुला दे जो किसी को भी, वही रसधार है कविता

पलक जब बन्द होती कल्पना के पार है कविता


नवांकुर जिंदगी की ये, प्रथम इक राह है कविता

दिवानों के दिलों की ये, सदा ही चाह है कविता


परिन्दों ने बिखेरे बीज खुद अंकुर हुई कविता

उठे जब भी कलम कवि की, नया ले जन्म इक कविता


■अभिनव मिश्र"अदम्य"

शाहजहांपुर,उत्तरप्रदेश


अगला लेख: करवा चौथ



बहुत सुन्दर.
इस में सौंदर्य रस और वीर रस के लिए भी जोड़ दीजिये.

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
06 नवम्बर 2020
अनमोल वचन ➖ 3सद्गुरु हम पर प्रसन्न भयो, राख्यो अपने संगप्रेम - वर्षा ऐसे कियो, सराबोर भयो सब अंग।सद्गुरु साईं स्वरूप दिखे, दिल के पूरे साँचजब दुःख का पहाड़ पड़े, राह दिखायें साँच।सद्गुरु की जो न सुने, आपुनो समझे सुजानतीनों लोक में भटके, तबतक गुरु न मिले महान।सद्गुरु की महिमा अनंत है, अहे गुणन की खानभव
06 नवम्बर 2020
20 अक्तूबर 2020
करियर चौराहे पर बैठामैं रास्तों को गिन रहा कभी रास्ते को नापता ,तो कभी चुपके से रास्तों में झांकता जाना तो मुझे करियर बनाने को है लेकिन यह रास्तेयह संकट मुसीबतें मुझे रोकने के लिए लगातार ताक रहे हैहर रास्ते में एक घोड़ा लिए बुद्धिमान खड़े हैसबके पास दिखाने को प्रमाण है यह देखिए जनाब हमारे घोड़े पर
20 अक्तूबर 2020
19 अक्तूबर 2020
गीतमधुमास के दिनों की, कुछ याद आ रही है।महकी हुई फिजाएं, मनको लुभा रही है।जब फूल-फूल तितली, खुशबू बिखेरती थी।महकी हुई हवाएं, संवाद छेड़ती थी।कोयल सदा वनों में, हैं राग प्रीत गाये।मौसम वही सुहाना, मुझको सदा लुभाये।महकी हुई धरा मन, मेरा लुभा रही है।मधुमास के दिनों की, कुछ याद आ रही है।भौंरे क
19 अक्तूबर 2020
06 नवम्बर 2020
जला के प्रीत का दीपक रहे उपवास वो निर्जलसजे श्रंगार सब देखो लगा है आंख में काजलपहन कंगन लगा बिंदी बंधी हैं पांव में पायलछुपेगा चांद भी इनसे, करेंगी रूप से घायलअभिनव मिश्र"अदम्य
06 नवम्बर 2020
20 अक्तूबर 2020
करियर चौराहे पर बैठामैं रास्तों को गिन रहा कभी रास्ते को नापता ,तो कभी चुपके से रास्तों में झांकता जाना तो मुझे करियर बनाने को है लेकिन यह रास्तेयह संकट मुसीबतें मुझे रोकने के लिए लगातार ताक रहे हैहर रास्ते में एक घोड़ा लिए बुद्धिमान खड़े हैसबके पास दिखाने को प्रमाण है यह देखिए जनाब हमारे घोड़े पर
20 अक्तूबर 2020
19 अक्तूबर 2020
19 अक्तूबर 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x