किसी

05 नवम्बर 2020   |  पंकज   (436 बार पढ़ा जा चुका है)

🌿🎶🙏

जय माँ वीणा वादिनी 🙏 आपकी सेवा में प्रस्तुत है -एक नयी आतुकांत रचना-


🍁" *किसी* "🍁


आज सुबह "किसी" ने भाव जगा दिए,


मैं समझ नहीं पाया उस किरण को,


कैसे आई-


फिर ''किसी'' बन गई,


ये "किसी" शायद एक स्थान है,

कोई पदवी है ,


उच्च वरीयता प्राप्त कोई ओहदा है,


जो हर आदमी इससे बंधा हुआ है,


एक संगीत सा बजता है- इस "किसी"शब्द में,


मैं जब भी इसका उच्चारण करता हूं,


एक मस्ती सी आ जाती है मन में,


चेहरा मुस्कुरा उठता है,


" किसी" शब्द बोलते ही...!!


कभी-कभी ये छुपा हुआ फरिश्ता का लगता है,


जिसका इंतजार हर आदमी को रहता है..!!


जैसे-जैसे मैं "किसी" की गहराई में उतरता हूँ,


वैसे-वैसे ये रहस्मयी होता जाता है..!!


मैं खोज में हूँ..

ऐसे शख्स की -

जो कहे -

मुझे "किसी" की जरूरत नहीं है,

लेकिन ये संभव सा नहीं लगता अक्सर..!!


इस रथ के घोड़े और सारथी- 'भविष्य' ही है,

दोनों मिलकर भ्रमण करते रहते हैं-संपूर्ण जगत में,


"किसी दिन आईये ना चाय पर"..!!

"जी ज़रूर आयेंगे"..!!

ये भविष्य काल का ही वार्तालाप है,


ये "किसी" अपना झंडा लेकर,

दोनों रथों पर विराजमान रहता है ,


यहाँ कोई कुरुक्षेत्र नहीं है,


लेकिन ये "किसी" हमेशा तैयार है-


"किसी" का "किसी" से झगड़ा करवाने के लिए..!!


वहीँ जब "किसी" का दिल- "किसी" पर आ ठहरता है..


तब दोनों का मिलान भी "किसी"के जिम्मे होता है,


"किसी" रोज उनसे मुलाकात होगी,

कभी सपनों में गीत गुनगुनाता है..!!


इस "किसी" का टोकरा बहुत बड़ा है..!

हर तरह के भाव भरे हैं..इसमें,

"किसी" का "किसी" से

वाद-विवाद/ प्रेम समर्पण/ "किसी" स्थान पर ,

"किसी" वस्तु के लिए,

आदि आदि,

तालिका बहुत लंबी है..


भविष्य के ताने-बाने बुनता है ये सबके साथ मिलकर..!!


लेकिन ये चालाक भी बहुत है,

भूतकाल में घुस के राजी नहीं है,

अगर जाना भी पड़े तो-


चोला बदल लेता है तुरंत..!!


ये तो सिर्फ चढ़ते सूरज को ही सलाम करता है,


मैं हैरान हूं "किसी" के किस्से सुनसुन कर..!!


यह अफवाहें भी फैलाता है..!!

कभी कानों-कान फुसफुसाता है..!!

"किसी" ने "किसी" को कुछ बताया..और

दंगा भड़क गया..!!


"किसी" ने "किसी" की जान बचा ली ,

और खुशी बंटने लगी..!!


"किसी" दिन "किसी" से मिलो तो... गले लग जाना...!!


फिर "किसी"दिन उन्हें चाय पे बुलाना...!!


"किसी" दिन

"किसी"शहर

" किसी" देश में,

"किसी" नदी किनारे,

"किसी" पर्वत पर....

कोई अंत नहीं है "किसी" का..!!


"किसी" दिन ईश्वर से मिलूंगा-

तब धन्यवाद कहूंगा,


उसे "किसी" के लिए...!!!!

🌿🍁🙏

स्वरचित

कुमार पंकज

नोयडा

9811017393

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