गरीब की दीवाली

13 नवम्बर 2020   |  अभिनव मिश्रा"अदम्य"   (452 बार पढ़ा जा चुका है)

गरीब की दीवाली

गरीब की दीवाली

दीवाली के दिए जले हैं

घर-घर में खुशहाली है।

पर इस गरीब की दीवाली

लगती खाली खाली है।


पैसा वालों के घर देखो

अच्छी लगे सजावट है।

इस गरीब के घर को देखो

टूटी- फूटी हालत है।


हाय-हाय बेदर्द विधाता

गला गरीबी घोट रही।

बच्चों के अब ख्वाब घरौंदे

लाचारी में टूट रही।


जेब पड़ी है खाली मेरी

कैसे पर्व मनाऊं मैं।

नहीं तेल है घर में मेरे

कैसे दीप जलाऊं मैं।


रूखा-सूखा भोजन करते

तम ने पैर पसारा है।

आज मुझे बतलादो भगवन

क्या अपराध हमारा है।


©मौलिक,स्वरचित:-

अभिनव मिश्र"अदम्य

शाहजहांपुर, उत्तरप्रदेश

गरीब की दीवाली
गरीब की दीवाली
गरीब की दीवाली

अगला लेख: करवा चौथ



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
02 नवम्बर 2020
विधा- दोहाविषय-लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल दृढ़ संकल्पो से सदा, खेला जिसने खेल।उस युगद्रष्टा को कहे, जग सरदार पटेल ।निज कर्मों से ही किया, सपनों को साकार।रियासतों से ही दिया, नव भारत आकार।आन्दोलन नेतृत्व कर, हित में रहा किसान।बहनों ने सरदार कह, किया सदा सम्मान।चारित्रिक दृढ़ से पड़ा, लौह पुरुष था ना
02 नवम्बर 2020
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x