वक़्त का तराजू

04 दिसम्बर 2020   |  अशोक सिंह 'अक्स'   (194 बार पढ़ा जा चुका है)

वक़्त का तराजू


वक़्त वह तराजू है साहब

जो बुरे वक़्त में अपनों का वजन बता देता है

पराये को साथ लाकर खड़ा कर देता है

वक़्त ही वह मरहम है साहब

जो गहरे से गहरे घाव को भी फौरन भर देता है

और भरे हुए घाव को कुरेदकर हरा कर देता है

वक़्त ही सबसे बड़ा गुरू है साहब

जटिल पाठ को भी पल भर में समझा देता है

मूर्ख को भी विद्वता का सरताज़ बना देता है

वक़्त की तालीम अनूठा है साहब

भुलाने से भी नहीं भूलता है

भूले को सही वक़्त पर याद भी आ जाता है

वक़्त की नजाकत समझनेवाला राज करता है

दुष्काल सी परिस्थिति में भी परवाज़ भरता है

वक़्त वह हमसफ़र है साहब

साथ चलने वाला बुलंदियों को छूता है

झोपड़े में रहकर भी महल का सुख भोगता है

वक़्त का अपना इतिहास है साहब

जिसने भी वक़्त को धता बताया है साहब

सच कहता हूँ......

वक़्त ने सँभलने का मौका ही नहीं दिया

सीधे चारो खाने चित कर दिया

वक़्त तो कालजयी है साहब

इतिहास पर इतिहास रच दिया

चायवाले को प्रधानमंत्री बना दिया

तेंडुलकर को क्रिकेट का भगवान बना दिया

बच्चन को सदी का महानायक बना दिया

ठाकरे को सत्ता की गद्दी दिला दिया

इस जग को कोरोना के हवाले कर दिया

वक़्त का भी वक़्त बदलता है साहब

वक़्त को मैंने सिसकियाँ भरते देखा है

रोते बिलखते खून के आँसू पीते देखा है

जब जब कलियुगी बाप ने अस्मिता लूटा है

वक़्त को मैंने सिर पीटते देखा है

जब-जब अबलाओं पर बलात्कार हुआ है

वक़्त को कुढ़ते-आगबबूला होते देखा है

यही अटल सत्य है साहब

उगते हुए सूरज को ढलते भी देखा है।

➖ अशोक सिंह 'अक्स'

#अक्स

#स्वरचित_हिंदीकविता

#पागल_पंथी_का_जुनून

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