एक मसीहा जग में आया....

08 दिसम्बर 2020   |  अशोक सिंह 'अक्स'   (16 बार पढ़ा जा चुका है)

एक मसीहा जग में आया....

एक मसीहा जग में आया....


एक मसीहा जग में आया
दलितों का भगवान बना
राजनीति मन को ना भाया
ज्ञानसाधना ही आधार बना।


निर्धनता को धता बताया
छात्रवृत्ति से अरमान सजोया
काला पलटन में स्थान मिला
गुरू से पूरा सम्मान मिला।


अर्थशास्त्र जो मन को भाया
डॉक्टरेट की डिग्री दिलवाया
वर्णव्यवस्था थी मन में चुभती
शोध प्रबंध उस पर ही छपती।


सकपाल छोड़ आंबेडकर कहलाए
गुरू का आदेश शिरोधार अपनाए
मानव में रक्त्त एक भाँति हैं आये
स्वार्थवश सब ने जाति-पाति बनाये।


छूत-अछूत को किया उजागर
दिलवाया समता का अधिकार
ज्ञान बढ़ा ऊँचा स्थान मिला
दलितोद्धार का मार्ग प्रशस्त किया।


कहते मानव-मानव एक समान
रच डाले भारत का संविधान
अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया
आंबेडकर ने खूब नाम कमाया।


दलितवर्ग का होके ब्राह्मणी से किए शादी
प्रबल समाज के ठोकर से हो गई बरबादी
बाबा ने अपना जीवन यों न्योछावर कर दी
जाते-जाते दलितोद्धार मार्ग प्रशस्त कर दी।


परिनिर्वाण दिवस लोंगों ने क्या खूब मनाया
मौत की गुत्थी कोई अभी सुलझा नहीं पाया
कोई कहता डायबिटीज तो कोई कहता हत्या
कूटनीतिक शिकार बन गए भाई बाबा सत्या।


एक मसीहा जग में आया
दलितों का भगवान बना
काम किया बड़ बोलों का
बाबा भीमराव था नाम बड़ा।


एक मसीहा जग में आया
दलितों का भगवान बना
सूर्य भाँति चमका जग में
फिर से अन्तर्धान हुआ।


➖अशोक सिंह 'अक्स'
#अक्स
#स्वरचित_हिंदीकविता

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