तुम शेर बन अड़े रहो....

22 दिसम्बर 2020   |  अशोक सिंह 'अक्स'   (459 बार पढ़ा जा चुका है)

तुम शेर बन अड़े रहो....

तुम शेर बन अड़े रहो....


कोरोना अभी गया नहीं...

शेर बन अड़े रहो, घर में ही डटे रहो

शेरनी भी साथ हो, शावक भी पास हो

बाहर हवा ठीक नहीं, निकलना उचित नहीं

शेर बन अड़े रहो, घर में ही डटे रहो...।


दूध की मांग हो या सब्जी की पुकार हो

भले राशन की कमी हो, तुम फिकर करो नहीं

तुम निडर खड़े रहो, बिल्कुल डरो नहीं

शेर बन अड़े रहो, घर में ही डटे रहो।


गालियां सुनते रहो, काम काज करते रहो

चौका बर्तन से न डरो, घर में ही डटे रहो

बीमार गर कोई भी हो, फोन कर दिया करो

तुम शेर बन अड़े रहो, घर में ही डेट रहो।


शेरनी बवाल करे, बस चुपचाप सहते रहो

कोरोना काल है, बस घर में ही डटे रहो

रात हो या दिन हो, गरम पानी पीया करो

तुम शेर बन अड़े रहो, घर में ही डटे रहो।


मास्क की कमी न हो, सेनिटाइजर साथ धरो

समय विकराल है, यमराज खड़े तैयार हैं

घर से तुम निकले नहीं, यमराजदंड चला नहीं

तुम शेर बन अड़े रहो, घर में ही डटे रहो।


वायरस अभी मरा नहीं, हवा भी डरा रही

वैक्सीन ईजाद हो रहा, इंतजार थोड़ा ही सही

यत्न कर निकाल लो, मुश्किल घड़ी ये सही

तुम शेर बन अड़े रहो, घर में ही डटे रहो।


आस-पास खौफ है, खौफ़जदा लोग हैं

आमदनी रही नहीं, खर्च ज्यों का त्यों सही

लोन किश्त बढ़ रही, ब्याज पे ब्याज चढ़ रही

तुम शेर बन अड़े रहो, घर में ही डटे रहो।


सालगिरह की दावत हो, शादी की बारात हो

बिरयानी का सुगंध हो, या 31st का प्रबंध हो

इरादे तुम धरो सही, संकल्प पर अड़े रहो

तुम शेर बन अड़े रहो, घर में ही डटे रहो।


ऑनलाइन काम करो, ऑफलाइन मौज करो

सारी फिक्र छोड़ दो, और मन को भी मोड़ दो

आखिरी सांस ले रहा, फिर सबकुछ खुल रहा

तुम शेर बन अड़े रहो, घर में ही डटे रहो।


ये आखिरी माह चला, फिर नया साल आ रहा

इसका ये नौवाँ महीना, कालचक्र पूरा हुआ

खौफजदा रहो नहीं, पर सावधानी धरो सही

तुम शेर बन अड़े रहो, घर में अटल डटे रहो।


कोरोना अभी गया नहीं, सावधानी धरो सही

तुम सीख लो सीख लो, जीनें की नई राह हो

मौत से डरते नहीं, पर सत्कर्म करना है अभी

तुम शेर बन अडिग रहो, घर में ही डटे रहो।


➖ अशोक सिंह 'अक्स'

#अक्स

#स्वरचित_हिंदीकविता

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