जिंदगी की बही

07 जनवरी 2021   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (401 बार पढ़ा जा चुका है)

जिंदगी की बही

★☆जिंदगी की बही☆★


जिंदगी की- ना बांचे बही
आज करदे- उसे तूं सही
आँसुओं की- नदी बह रही
लबों पे- खुशी छा रही
जिंदगी की- बांचे ना बही
आज करदे- उसे तूं सही
जोश की किरणें- छा रहीं
गर अँगुलियाँ- हरकत ना करी
पन्ना पलट- देखा ना कभी
आगे की फिक्र- करो अब सभी
किश्ती साहिल की ओर- चली
मंझधार में- थी वो फंसी
जिंदगी की- पूरी बांच बही
बांचले तूं लकिरें सही
जिंदगी की बांचे ना बही
बांच करदे उसे तूं सही
उम्र के दिन जाया हुए
नेकी की डगर ना चले
जिंदगी की ना बांचे बही
बांच करदे उसे तूं सही


डॉ. कवि कुमार निर्मल

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