दोहा

15 जनवरी 2021   |  महातम मिश्रा   (328 बार पढ़ा जा चुका है)

"दोहा"


उमड़ घुमड़ नभ छा रहे, ये ठंडी के मेह।

रात गई बादल घिरे, दिन में ठिठुरे देह।।-1


बूँद बूँद में है अमिय, औ बादल में बूँद।

धरती की अभ्यर्थना, भर दे गागर दूध।।-2


वरखा रानी आ तनिक, रख फसलों की चाह।

बिनु पानी गुलशन नहीं, बिनु दरख़्त कब छाँह।।-3


ऋतु वर्षा की यह नहीं, पर फसलों की चाह।

बुझा प्यास सावन प्रिया, नहीं ठंड परवाह।।-4


छाई है तू गगन में, धरा निहारे राह।

वर्षा हर्षित कर कृषक, उठती उर में आह।।-5


'गौतम' तेरे बाग में, भाँति भाँति के फूल।

धो देगी वर्षा सहज, जमकर बैठी धूल।।-6


महातम मिश्र 'गौतम' गोरखपुरी

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