बेटी की पुकार

15 जनवरी 2021   |  अभिनव मिश्र"अदम्य"   (508 बार पढ़ा जा चुका है)

बेटी की पुकार

सगुण छन्द
122 122 122 121

कहे गर्भ से आज बेटी पुकार।
नही इस तरह कोख में मातु मार।


यही चाहती माँ तुम्हीं से जवाब।
बनी बेटियाँ क्यों जगत में खराब।


रहीं देश में बेटियाँ भी सुजान।
सदा आप समझो सुता-सुत समान।


करो माँ न कच्ची कली पे प्रहार।
नही इस तरह कोख में मातु मार।


मुझे दीजिये जन्म माता अनूप।
हमें देखना है जगत का स्वरूप।


सदा ले सकूँ खुशनुमा नित बहार।
हमें चाहिए आपका माँ दुलार।


न अपराध मेरा कहूँ मैं पुकार।
नही इस तरह कोख में मातु मार।


पढूँगी लिखूँगी बनूँ मैं महान।
रखूँ मैं सदा आपका तात मान।


नही आप पर मैं बनूँ मातु बोझ।
करूँ स्वयं रक्षा बनूँ एक ओज।


कि विनती यही मैं करूँ बार-बार।
नही इस तरह कोख में मातु मार।


अभिनव मिश्र "अदम्य"

अगला लेख: अंतर्राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित हुए कवि अभिनव मिश्र 'अदम्य'



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x