मुक्तक

16 जनवरी 2021   |  Dr Narendra Kumar Patel   (79 बार पढ़ा जा चुका है)

सुलगते आग को मै इश्क़ बता देता हूँ

इस तरह लफ्ज़ों का मै जाल बना देता हूँ


जो मेरे इश्क में पतंगों से जल गये यारों

उन्ही को आज से आशिक करार देता हूँ

©®डॉ नरेन्द्र कुमार पटेल


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