चक्रव्यूह

23 जनवरी 2021   |  Karan Singh Sagar ( डा. करन सिंह सागर)   (11 बार पढ़ा जा चुका है)

सवालों और जवाबों

के चक्रव्यूह में

फँस गयी है ज़िंदगी

कल क्या हुआ

कल क्या होगा

यह मेरा है, वो तेरा

इन्ही, सवालों और जवाबों

के चक्रव्यूह में

फँस गयी है ज़िंदगी

दुनिया क्या कहेगी

यह सही वो ग़लत

यह अच्छा वो बुरा

इन्ही, सवालों और जवाबों

के चक्रव्यूह में

फँस गयी है ज़िंदगी


२३ जनवरी २०२१

जिनेवा



अगला लेख: आ गयी है ज़िंदगी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
23 जनवरी 2021
को
कोशिशें हज़ार क़ींदर्द अपना छुपाने कीज़ख़्म इतना गहरा थाकि, मुस्कुराहट के पीछे भीरंजीदगी छुप ना सकी कोशिशें हज़ार क़ींआंसुओं के सैलाब को रोकने कीभरा था दिल इतना मगर आँखों के बाँध भी उसे बहने से रोक ना सके कोशिशें हज़ार क़ींयादों को दफ़नाने की प्यार बेंतिहा था मगर कब्र से भी लौट आयी यादें मुझे सताने
23 जनवरी 2021
23 जनवरी 2021
अनकही बातों को अनकही रहने दो जीने दो इसी भ्रम मेंप्यार ना किया ज़ाहिर तुमने भी और मैंने भी के तेरे भी वो ही हालात हैं जो मेरे हैंअनकही बातों कोअनकही ही रहने दो जीने दो इसी भ्रम मेंधड़क रहा है मेरा दिल तेरे सीने मेंतेरा दिल मेरे पास है अनकही बातों को अनकही ही रहने दो र
23 जनवरी 2021
23 जनवरी 2021
आ गयी है ज़िंदगीआ गयी है ज़िंदगी ऐसे पड़ाव पर कहना है अलविदा अपने आप से रिश्तों के तानेबानेलगने लगे हैं बेज़ार से मिलना है जिनसे आख़िरी बार हैं कुछ पास तो कुछ हैं, दूर होगी उनसे बातया मुलाक़ात मालूम नहीं थमने को हैं साँसेबस इंतेज़ार में आ गयी है ज़िंदगी ऐसे पड़ाव पर २८ नवंबर २०२०दिल्ली
23 जनवरी 2021
23 जनवरी 2021
जा
जानता हूँ मैं चिल्ला देता हूँ तुम पर कभी जानता हूँ कि तुम समझ जाओगी मेरी दशा और नहीं करोगी मुझे खुद से दूर रो लेता हूँ तुम्हारे सामने जानता हूँ कि तुम दोगी मुझे तसल्ली नहीं समझोगी कमजोरहँस लेता हूँ तुम्हारे साथ जानता हूँ कि तुम बाँटोगी मेरी ख़ुशी नहीं करोगी रश्क़दर्द अपना कर लेता हूँ तुम से साँझाजान
23 जनवरी 2021
23 जनवरी 2021
जा
जानता हूँ मैं चिल्ला देता हूँ तुम पर कभी जानता हूँ कि तुम समझ जाओगी मेरी दशा और नहीं करोगी मुझे खुद से दूर रो लेता हूँ तुम्हारे सामने जानता हूँ कि तुम दोगी मुझे तसल्ली नहीं समझोगी कमजोरहँस लेता हूँ तुम्हारे साथ जानता हूँ कि तुम बाँटोगी मेरी ख़ुशी नहीं करोगी रश्क़दर्द अपना कर लेता हूँ तुम से साँझाजान
23 जनवरी 2021
17 जनवरी 2021
खुद ही से मैं नज़रें चुराने लगी हूं,उन यादों से दामन छुड़ाने लगी हूँ ।खुद ही से खुद ही का पता पूछती हूँ,न जाने कहाँ मैं विलीन हो चुकी हूँ ।अरमानों को अपने दबाने लगी हूँ,पहचान अपनी भुलाने लगी हूँ ।भटकने लगी राह मंज़िल की अपनी,कहूँ क्या किधर थी, किधर को चली हूँ । ....और पढ़ें
17 जनवरी 2021
23 जनवरी 2021
नज़र आया इश्क़ के आइने में देखा चेहरा तेरा नज़र आया दिल के दर्पण में देखा अक्स तेरा नज़र आया नज़रों के झरोख़े में देखा रूप तेरा नज़र आया बस गए हो तुम इस तरह ज़ेहन में खुद में भी बस तसव्वुर तेरा नज़र आया ५ दिसंबर २०२०दिल्ली
23 जनवरी 2021
23 जनवरी 2021
तू मिल कर भी ना मिला मुझे मैं मिले बिना भी तेरा हो गया तू ना समझा कोई बात मेरी मैं तेरे एक इशारे को दिल से लगा बैठा तू दिल्लगी करता रहा मैं दिल लगा बैठा तुझसे तू अपनी मंज़िल की तरफ़ बढ़ गया मैं उसी राह मेंतेरे इंतज़ार में बैठा रहा तू मिल कर भी ना मिला मुझसे २२ दिसंबर २०२०दिल्ली
23 जनवरी 2021
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x