अनकही बातों को

23 जनवरी 2021   |  Karan Singh Sagar ( डा. करन सिंह सागर)   (16 बार पढ़ा जा चुका है)

अनकही बातों को

अनकही रहने दो

जीने दो इसी भ्रम में

प्यार ना किया ज़ाहिर

तुमने भी और मैंने भी

के तेरे भी वो ही

हालात हैं जो मेरे हैं

अनकही बातों को

अनकही ही रहने दो

जीने दो इसी भ्रम में

धड़क रहा है

मेरा दिल तेरे सीने में

तेरा दिल मेरे पास है

अनकही बातों को

अनकही ही रहने दो

रहने दो इसी भ्रम में

मिलेंगे एक रोज़ हम

कभी ना बिछड़ने को

जीने दो इसी भ्रम में


२१ दिसंबर २०२०

दिल्ली


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