मुक्तक

28 जनवरी 2021   |  महातम मिश्रा   (14 बार पढ़ा जा चुका है)

"मुक्तक"


सु-लोहड़ी खिचड़ी गई, अब शुभ प्रयाग स्नान।

गंगा जी के धाम में, बिन आधार न दान।

बिनु कोरोना जाँच के, सुखी न संगम द्वार-

रोज सभाएँ हो रहीं, धरना धर्म किसान।।-1


बंधन हिंदू धर्म पर, लगता है चहुँ ओर।

बिनु मुर्गे की बाग के, कहाँ द्वार पर भोर।

पौराणिक मेला स्वयं, भरता है प्रति वर्ष-

अब संगम भय खा रहा, कोरोना का शोर।।-2


महातम मिश्र 'गौतम' गोरखपुरी

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