बसंतागमन

16 फरवरी 2021   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (429 बार पढ़ा जा चुका है)

बसंतागमन

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🌱 वसंत ऋतु की पहली कोपल 🌱

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नैसर्गिक बीज एक नील गगन से-

पहला जब वसुन्धरा पर आ टपका।

मिट्टी की नमी से सिंचित हो वह-

ध्रुतगति से पनप खिल कर महका।।

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सूर्य उर्जा से अवशोषित उष्णता

मिट्टी से अंत-शोषण- पोषण- संचय।

प्रथम अंकुरण पा कर बड़भागी

कोपल फुटी तो! पोसा संशय।।

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लगा खोजने पादप नियंत्रक को

पर वह नहीं कहीं और मिल पाया।

हर पल महसूस किया सन्निकट,

हरीनाम उचर- अराध्य उसे बनाया।।

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मानव नवान्न फल फूल तोड़ कर-

हरि प्रसाद समझ कर उसको खाया।

हरी को रूप दे पत्थर में बैठा कर-

जीवंत मूक मुद्रा में! उसको पाया।।

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जल-पुष्प-अक्षत-तांबूल से

नित दिन पूजन में उसे चड़ाया।

अंत काल में हरिनाम बिसार

हरियाली भरा वसंत फिर आया।।

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नैसर्गिक बीज एक नील गगन से-

पहला जब वसुन्धरा पर आ टपका।

मिट्टी की नमी से सिंचित हो वह-

ध्रुतगति से पनप खिल कर महका।।

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🙏डॉ. कवि कुमार निर्मल🙏

बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार

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