मन पाखी की उड़ान - प्रेम कविता

11 मार्च 2021   |  रेणु   (448 बार पढ़ा जा चुका है)

मन पाखी की उड़ान - प्रेम कविता

मन पाखी की उड़ान

तुम्हीं संग मन मीता

जीवन का सम्बल तुम एक

भरते प्रेम घट रीता !


नित निहारें नैन चकोर

ना नज़र में कोई दूजा

हो तरल बह जाऊं आज

सुन मीठे बैन प्रीता !

बाहर पतझड़ लाख

चिर बसंत तुम मनके

सदा गाऊँ तुम्हारे गीत

भर - भर भाव पुनीता !


बिन देखे रूह बेचैन

हर दिन राह निहारे

लगे बरस पल एक

साथी !जो तुम बिन बीता !


निर्मम वक़्त की धार

ना जाने किधर मुड़ जाए

छोडो गूढ़ -ज्ञान व्यापार

पढो !आ प्रेम की गीता ! !


चित्र - गूगल से साभार





अगला लेख: काव्य संध्या



आलोक सिन्हा
12 मार्च 2021

बहुत बहुत सुन्दर

आलोक सिन्हा
12 मार्च 2021

बहुत बहुत सुन्दर

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x