मनोज्ञा छंद "होली"

15 मार्च 2021   |  बासुदेव अग्रवाल 'नमन'   (441 बार पढ़ा जा चुका है)

मनोज्ञा छंद "होली"


भर सनेह रोली।

बहुत आँख रो ली।।

सजन आज होली।

व्यथित खूब हो ली।।


मधुर फाग आया।

पर न अल्प भाया।।

कछु न रंग खेलूँ।

विरह पीड़ झेलूँ।।


यह बसंत न्यारी।

हरित आभ प्यारी।।

प्रकृति भी सुहायी।

नव उमंग छायी।।


पर मुझे न चैना।

कटत ये न रैना।।

सजन याद आये।

न कुछ और भाये।।


विकट ये बिमारी।

मन अधीर भारी।।

सुख समस्त छीना।

अति कठोर जीना।।


अब तुरंत आ के।

हृदय से लगा के।।

सुध पिया तु लेवो।

न दुख और देवो।।

=============

लक्षण छंद:-


"नरगु" वर्ण सप्ता।

रचत है 'मनोज्ञा'।।


"नरगु" = नगण रगण गुरु

111 212 + गुरु = 7-वर्ण

चार चरण, दो दो समतुकांत।

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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

तिनसुकिया


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