बनकर रह जाएगा इतिहास

07 मई 2021   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (412 बार पढ़ा जा चुका है)

बनकर रह जाएगा इतिहास

बनकर रह जाएगा इतिहास

कोरोना के आतंक से आज चारों ओर भय का वातावरण है... जो स्वाभाविक ही है... क्योंकि हर दिन केवल कष्टदायी समाचार ही प्राप्त हो रहे हैं... हालाँकि बहुत से लोग ठीक भी हो रहे हैं, लेकिन जब उन परिवारों की ओर देखते हैं जिन्होंने अपने परिजनों या परिचितों मित्रों को खोया है, तब वास्तव में हर किसी के मन में भय और कष्ट के मिश्रित भाव घर करते जाते हैं... लेकिन हमें विश्वास है कि बहुत शीघ्र ये समय इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह जाएगा...

आज छाया हुआ है दसों दिशाओं में अन्धकार ही अन्धकार

और उठा है प्रकृति के कण कण में भयंकर तूफ़ान...

काल की व्यथा कथा ऐसी / कि लिखी जाएगी कभी इतिहासों में...

न जाने छूट गए कितनों के साथी बारी बारी

मानों छूट गई हो अपनी ही परछाईं कहीं बहुत पीछे...

बिखर चुके हैं न जाने कितने ही घर

मानों बिखर गए हों भोर के साथ निशा के मधुर स्वप्न...

भग्न हृदय लिए न जाने कितने बैठे हैं आस में

कभी तो छंटेंगे ये दुःख के बादल...

देख रहे हैं टुकड़ों में बिखर गए अपने ही मन को

जैसे तकता है चाँद नदी के प्रवाह में बिखरी हुई अपनी ही छवि को...

झुलस चुकी हैं मनुष्य की कोमल भावनाएँ / कष्टों की इस ज्वाला में

जैसे झुलस जाती हैं वनस्पतियाँ सूर्य की धूप के ताप से...

सूनी हो चुकी है किसी माँ की गोद / बह गया है किसी की माँग का सिन्दूर

टूट कर बिखर गए हैं किसी अबोध के खिलौने

तो कोई कर रहा है रुदन लिपट कर अर्थी से अपनी प्यारी सखी की...

अभी कुछ ही दिनों की तो बात है

इसी ख़ाली पड़ी चारपाई पर / सहलाती थी माँ सर जब आते थे थककर...

इसी उजाड़ हो चुके बागीचे में

अठखेलियाँ करते थे तोता मैना की नाईं / जब होता था एकान्त...

इसी रीते पड़े कमरे में रचाते थे ब्याह गुड़िया गुड्डे का

और इन्हीं सूनी आँखों से निहारती गलियों में

खेलते थे कंचा गोली / गिल्ली डंडा / भूलकर संसार को...

ये स्कूल चहकते रहते थे बच्चों की शरारतों से

ये कॉलेज की बिल्डिंग्स गुलज़ार रहती थीं

अभी अभी युवा हुए प्रेमी युगलों की फुसफुसाहटों से

ये बाज़ार ये दुकानें रहती थीं आबाद ख़रीदारों के मोल भावों से...

लेकिन आज खड़ा है हर कोई लाचार / भ्रमित

क्योंकि वातायन के उस पार खड़ा समय

चिढ़ा रहा है मुँह मनुज को / कि अहंकार और वो भी मेरे सामने ?

अरे “मैं समय हूँ” जो कभी नहीं रहता एक जैसा...

अनादि काल से अनन्त काल तक / हर समय मैं ही मैं हूँ...

सृष्टिकर्ता ब्रह्म भी हूँ मैं ही

और विध्वंस का ताण्डव रचाता रूद्र भी हूँ मैं ही...

कभी हूँ मैं प्रस्तरसम / तो कभी मैं ही हूँ शीतल मलय बयार

कभी मैं ही बींध देता हूँ नागफनी सा

और बह जाता है जन मानस का रक्त / प्रवाह में अश्रुधारा के

तो कभी माँ की तरह सहलाकर पुचकार देता हूँ मैं ही...

और इसीलिए एक क्षीण सी रेखा प्रकाश की

आ रही है छनती हुई हृदय के वातायन से...

क्योंकि है विश्वास / कि अनादि और अनन्त होते हुए भी

समय नहीं रहता कभी एक समान

चक्र की नेमि के समान बदलता रहता है हर पल...

इसीलिए निराश नहीं मेरा मन

समय बदलेगा / और आज का ये अन्धकारपूर्ण समय

बनकर रह जाएगा इतिहास...

इसलिए, चिन्ता मत कीजिए... साहस, आशा और विश्वास के साथ इसका सामना कीजिए... विश्वास कीजिए विजय मानवता की होगी... लेकिन तभी जब हम मास्क, सेनिटायिजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते रहेंगे... कात्यायनी...

अगला लेख: है कौन ये अदृश्य



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
15 मई 2021
नमस्कार मित्रों... आज सभी कोरोना के कारणडरे हुए हैं... एक ऐसा वायरस जिसके रूप में एक अदृश्य शक्ति ने हर किसी को घरोंमें कैद किया हुआ है... किन्तु यह भी सत्य है कि ऐसी कोई रात नहीं जिसकी सुबह नहो... इसीलिए है विश्वास कि शीघ्र ही सुख का सवेरा होगा और कष्ट की इस बदली कोचीरता सूर्य चारों ओर अपनी मुस्करा
15 मई 2021
25 अप्रैल 2021
प्रसिद्ध कविवर ने कहा था कि आह से उपजा होग गान नयनों से बही होगी चुपचाप कविता अनजान। कविता तो मन की परतों से निकले भावों की अभव्यक्ति हैं। तो फिर भाव बड़े या कविता का व्याकरण? दोनों ही महत्वपूर्ण। भाव को लयबद्ध कर दे तो कविता सुमधुर गान का रूप ले लेती है जिसे गुनगुनाया जा स
25 अप्रैल 2021
04 मई 2021
बात पिछले बरस की है... इसीकोरोना के चलते देश भर में लॉकडाउन घोषित हो गया था... हर कोई जैसे अपने अपने घरोंमें कैद होकर रह गया था... ऐसे में प्रवासी मजदूर – जो रोज़ कुआँ खोदकर पानी पीतेहैं – जिन्हें आम भाषा में “दिहाड़ी मजदूर” कहा जाता है - दिल्ली में या और भी जिनशहरों में थे उन सभी को चिन्ता सतानी स्वा
04 मई 2021
30 अप्रैल 2021
आज हरकोई डर के साए में जी रहा है | कोरोनाने हर किसी के जीवन में उथल पुथल मचाई हुई है | जिससे भी बात करें हर दिन यही कहता मिलेगा कि आज उसके अमुकरिश्तेदार का स्वर्गवास हो गया कोरोना के कारण, आज उसका अमुक मित्र अथवा परिचित कोरोना की भेंट चढ़ गया | पूरे के पूरे परिवार कोरोना की चपेटमें आए हुए हैं | हर ओ
30 अप्रैल 2021
01 मई 2021
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आज समूचा देशकोरोना के आतंक से जूझ रहा है... न जाने कितने परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोयाहै... पूरे के पूरे परिवार कोरोना से संक्रमित होते जा रहे हैं... ऊपर से ऑक्सीजनऔर दवाओं की कालाबाज़ारी... जमाखोरी... साथ में तरह तरह की अफवाहें... और इस सबकापरिणाम है कि आज हर कोई डर
01 मई 2021
23 अप्रैल 2021
📙📓📘📗📗📘📓📙📘📗पुस्तक दिवस📗📘📓📙📓📘📗📗📘📓📙पुस्तकों का अंबार कहाँ-अब एण्ड्रॉयड का खेल है।विमोचन औन लाइन-'इंटरनेट' एक्सप्रेस-मेल है।।शीलालेख से भोजपत्र की दौड़-अब ई पेपर टेल है।सृजन कर सेयर करलो -ग्रुप्स की चल रही रेल है।।बिचारा विद्यार्थी उदास-लटकाये बस्ता कई सेर है।तक्षशिला राख हुई-खुदाबख्
23 अप्रैल 2021
11 मई 2021
है समय अब भी संभल जाओ सरल नादान मानव, है समय अब भीसंभल जा |हो रहा है खेल जबकि, सामने जीवनमरण का ||मन में मीठी कल्पना ले, नीड़ स्वप्नों में बनाकर जा रहे उड़ते विहग संकेत सा करतेगगन में |चाँद भी खोया गगन में, जो बना सबका सहारा हो रहा है खेल क्योंकि सामने जीवनमरण का ||हैं थकित तन और मन, हैं थक चुकीं अभिल
11 मई 2021
03 मई 2021
आज कोरोना से आतंकित है हर कोई...ऐसे में एकमात्र अवलम्ब है तो वह है हमारा साहस... समझदारी... एक दूसरे का साथसहयोग... सकारात्मकता... और एक ख़ास बात... हमें उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना है...मन में दृढ़ आशा और विश्वास बनाए रखना है कि बहुत शीघ्र इस आपत्ति से मुक्तिप्राप्त होगी... ये वक़्त भी गुज़र जाएगा... नही
03 मई 2021
12 मई 2021
आज जिस प्रकार आतंक औरभय का वातावरण दीख पड़ रहा है – चाहे वो कोरोना जैसी महामारी के कारण हो, या पिछले दिनों बंगाल में जिस प्रकार हिंसक घटनाएँघटीं उनको देखते हुए हो – इस प्रकार के वातावरण में तो वास्तव में ईश्वर याद आताही है सभी को... जो लोग दूसरों की ह्त्या करते हैं, या जो लोग ऑक्सीजन और दवाओं की जमाख
12 मई 2021
09 मई 2021
मदर्स डेआज मातृदिवस यानी “मदर्स डे” है | सर्वप्रथम सभीको मदर्स डे की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ... यों भारत जैसे परम्पराओं का निर्वाहकरने वाले देश में ऐसे बहुत सारे पर्व आते हैं जो केवल और केवल मातृ शक्ति को हीसमर्पित होते हैं... जिनमें सर्वप्रथम तो ये जितने भी देवता हैं उन सबकी पूजा उनकीदेवियों के स
09 मई 2021
13 मई 2021
अक्षय तृतीया का अक्षय पर्वॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीनारायणाभ्यां नमःॐ जमदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम:प्रचोदयातकल यानी शुक्रवार 14 मई को वैशाख शुक्ल तृतीय अर्थात अक्षयतृतीया का अक्षय पर्व है, जिसे भगवान् विष्णु के छठे अवतारपरशुराम के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है | तृतीयातिथि का आर
13 मई 2021
23 अप्रैल 2021
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedC
23 अप्रैल 2021
30 अप्रैल 2021
आज हरकोई डर के साए में जी रहा है | कोरोनाने हर किसी के जीवन में उथल पुथल मचाई हुई है | जिससे भी बात करें हर दिन यही कहता मिलेगा कि आज उसके अमुकरिश्तेदार का स्वर्गवास हो गया कोरोना के कारण, आज उसका अमुक मित्र अथवा परिचित कोरोना की भेंट चढ़ गया | पूरे के पूरे परिवार कोरोना की चपेटमें आए हुए हैं | हर ओ
30 अप्रैल 2021
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x