अजीब मसला है जिंदगी का।

13 मई 2021   |  जानू नागर   (376 बार पढ़ा जा चुका है)

अजीब मसला है जिंदगी का।

लोग कहने लगे है, रही जिंदगी, तो दुनियाँ जहां को समझ लेंगे।

लहरे भी अनगिनत होंगी कोरोना की अभी, तीसरी का इंतजार है।

पहली लहर से घबराए भागे, मौत से बचने के लिए योंही जिंदगियां गवा दिए रोड, रेल ट्रैक पर।

दीन दानवीरों की टोलियां मद्दत किया उनकी जो प्रवासी मजदूर बन गए थे।

अजीब मसला है जिंदगी का।

दूसरी लहर में कुछ न थमा शिवा मानव की सासों के रेल बेस योंही दौड़ती रही।

एक तरफ अस्पताल में मौत का मंजर रहा। गली के दोनों कोनो से एक तरफ से, लाश के वास्ते, दूसरी तरफ बरात के वास्ते।

शहर की लाशें समशान और कब्रो में, गाँवों की लाशें गंगा यमुना की धारा में।

अजीब मसला है जिंदगी का।

जन जन लगा रहा आत्मनिर्भर बनने में, देश आत्मनिर्भर बन सका हाथ फैलाया दुनियाँ में।

राजनीति अब ओछी लगने लगी, तीमारदारों की बातों में।लाशों के अम्बार भी उन्हें कूड़े के ढेर लगते है, तरस नही खाती उनकी निगाहे सच को छुपाने में।

आत्मनिर्भर देश बन न सका, आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाते रहे चुनाव की रैलीयों में।

अजीब मसला है जिंदगी का।

कमा करोङो अरबो न बचा सके भाई-बहन, माँ-बाप के साथ अपनी संतानों को।

देख लाशों के मंजरों को गाँव शहर सब कॉप गए। अभी अधिकारी कहते है जांच होगी इन लाशों की।

कौन मरा कोरोना से, कौन मरा बुढापा से, कुछ तो अटैक, अस्थमा, मर गए सास की बीमारी से।

अजीब मसला है जिंदगी का।

अगला लेख: हालात बदले हुए है।



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x